बागी सांसदों पर भड़के TMC के कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद, बोले-इस्तीफा दो और जहां जाना है जाओ
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की धमकी देने वाले नेता राजनीतिक नैतिकता खो चुके हैं और वे भाजपा के संपर्क में हैं। कल्याण बनर्जी ने इन नेताओं को “गद्दार” और “सत्ता के भूखे” तक कह दिया।

नई दिल्ली: West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुली राजनीतिक जंग का रूप लेती नजर आ रही है। पार्टी के कुछ सांसदों के बागी रुख अपनाने के बाद संगठन में तनाव बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि अब टीएमसी के वरिष्ठ नेता खुलकर मोर्चा संभालते हुए बागी सांसदों पर तीखे हमले कर रहे हैं। पार्टी के भीतर बढ़ते इस विवाद ने बंगाल की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बोला हमला
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की धमकी देने वाले नेता राजनीतिक नैतिकता खो चुके हैं और वे भाजपा के संपर्क में हैं। कल्याण बनर्जी ने इन नेताओं को “गद्दार” और “सत्ता के भूखे” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी से असहमति है, तो उसे पहले सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आरोप लगाने के बाद इस्तीफा दिया था, इसलिए अन्य बागियों को भी यही रास्ता अपनाना चाहिए।
भाजपा से रिश्तों के आरोपों ने बढ़ाया विवाद
टीएमसी नेताओं ने बागी सांसदों पर भाजपा से नजदीकी बढ़ाने के आरोप भी लगाए हैं। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि जिस दिन कुछ बागी सांसद भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मिले, उसी दिन यह स्पष्ट हो गया कि वे पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल भाजपा बंगाल में टीएमसी को कमजोर करने के लिए अंदरूनी टूट को बढ़ावा दे रही है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों की ताकत हो सकती है, लेकिन टीएमसी के साथ बंगाल की जनता और “मां, माटी, मानुष” की भावना खड़ी है।
कीर्ति आजाद ने भी बागियों को दी चुनौती
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कुछ नेता भाजपा के साथ जाना चाहते हैं तो उन्हें खुले तौर पर यह स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले होते हैं, तो ये नेता कहां खड़े होते हैं। कीर्ति आजाद ने काकोली घोष दस्तीदार को भी निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी ने कई मौके दिए, लेकिन वह लगातार संगठन के खिलाफ खड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ जाने वालों को टीएमसी का नाम लेने का नैतिक अधिकार नहीं है।
आरजी कर मामले को लेकर भी हुई बयानबाजी
कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं को आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े विवाद को लेकर भी घेरा। उन्होंने सवाल किया कि उस समय ये नेता कहां थे, जब पार्टी कार्यकर्ता कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने संगठनात्मक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाई और केवल राजनीतिक लाभ के लिए सक्रिय रहते हैं। इस बयानबाजी ने विवाद को और अधिक बढ़ा दिया है।
सागरिका घोष का बयान
राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वफादारी केवल राजनीतिक लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की नैतिकता सत्ता और फोन कॉल के प्रभाव में बदल जाती है। टीएमसी में बढ़ता संकट और आगे की चुनौती
बागी खेमे की बैठक
सूत्रों के अनुसार, टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर बागी सांसदों की एक बैठक भी हुई। इस बैठक में जून मालिया, बापी हलदर, अबू ताहिर खान और असित कुमार जैसे कई सांसदों के शामिल होने की बात सामने आई है। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को बागी गुट के संगठनात्मक विस्तार और रणनीति तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी नेतृत्व और बागी गुट के बीच तनाव और बढ़ गया है।
काकोली घोष दस्तीदार का पलटवार
बागी खेमे की ओर से काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी नेतृत्व के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष था, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। उनके अनुसार, सांसदों को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसे “गद्दारी” कहना गलत है। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों का कदम किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि बंगाल और जनता के हित में उठाया गया है। काकोली ने कहा कि वह वर्षों से ममता बनर्जी के साथ हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।


