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हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई छापेमारी से जुड़ी याचिका पर बंगाल पुलिस से जवाब मांगा

कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सोमवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के अंदर एक हलफनामा दाखिल करें

हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई छापेमारी से जुड़ी याचिका पर बंगाल पुलिस से जवाब मांगा
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कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सोमवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के अंदर एक हलफनामा दाखिल करें। यह मामला इस महीने की शुरुआत में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड पर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के घर पर सुबह-सुबह की गई छापेमारी और तलाशी की कार्रवाई को चुनौती देने से जुड़ा है।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने राज्य पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वे रेड और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई बातचीत के सभी सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

साथ ही, सिंगल बेंच ने मामले में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि राज्य पुलिस के कोर्ट में अपना हलफनामा जमा करने के दो हफ्ते के भीतर वे अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करें।

बता दें कि वेस्ट मिदनापुर जिला पुलिस के तहत सालबोनी पुलिस स्टेशन, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) और कोलकाता पुलिस की एक संयुक्त टीम ने 13 जून को सुबह 3 बजे उनके एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय की तलाश में रेड और सर्च ऑपरेशन चलाया था, जो अभी फरार है।

कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके सुबह-सुबह किए गए रेड और सर्च ऑपरेशन को चुनौती दी गई और राज्य पुलिस पर इस मामले में ज्यादती करने का आरोप लगाया गया। इस मामले की सुनवाई सोमवार को हुई।

अभिषेक बनर्जी (जो पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं) की ओर से बहस करते हुए उनके वकील और पश्चिम बंगाल के पूर्व एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने कहा कि उनके क्लाइंट के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन एक ऐसी शिकायत के आधार पर किया गया था, जिसमें अभिषेक बनर्जी का नाम शामिल नहीं था।

दत्ता ने दलील देते हुए कहा, "शिकायत में सुमित रॉय का नाम था। क्लाइंट के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन सुबह-सुबह सिर्फ इस शक के आधार पर किया गया कि सुमित रॉय वहां मौजूद हो सकते हैं। पुलिस टीम सुबह 3 बजे मेरे क्लाइंट के घर पहुंची और आखिरकार राज्य आपदा प्रबंधन कर्मियों की मदद से मेन गेट का ताला तोड़ दिया।"

जब जस्टिस भट्टाचार्य ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता के वकील रेड और सर्च ऑपरेशन पर ही आपत्ति जता रहे हैं तो उन्होंने कहा कि आपत्ति पुलिस की कथित ज्यादती पर थी, क्योंकि सर्च ऑपरेशन बिना सर्च वारंट के किया गया था।

उन्होंने राज्य पुलिस पर अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने अपने जवाबी तर्क में कहा कि सर्च ऑपरेशन इसलिए किया गया क्योंकि आशंका थी कि सुमित रॉय भागने की कोशिश कर सकते हैं। सुनवाई के आखिर में जस्टिस भट्टाचार्य ने राज्य पुलिस को इस मामले में चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को भी पुलिस का हलफनामा जमा होने के दो हफ्ते बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।


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