Top
Begin typing your search above and press return to search.

कोलकाता में अवैध कोयला खनन मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कोयला खनन और उससे जुड़े व्यापक आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष एक अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है

कोलकाता में अवैध कोयला खनन मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
X

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कोयला खनन और उससे जुड़े व्यापक आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष एक अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है। यह शिकायत चिन्मय मंडल, किरण खान समेत पांच आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है। इन पर अवैध कोयला खनन, चोरी, अवैध परिवहन, कोयले की गैरकानूनी बिक्री, जाली दस्तावेजों के उपयोग और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

ईडी ने इस मामले की जांच ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस की शिकायतों के आधार पर शुरू की थी। जांच का आधार पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र के विभिन्न थानों में दर्ज 54 एफआईआर बनीं। जांच में सामने आया कि चिन्मय मंडल, किरण खान और उनके सहयोगी एक संगठित कोयला सिंडिकेट का हिस्सा थे, जो इस पूरे क्षेत्र में सक्रिय था और अवैध गतिविधियों को संगठित तरीके से अंजाम दे रहा था।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट झारखंड से पश्चिम बंगाल तक अवैध रूप से कोयले के परिवहन और उसकी बिक्री में शामिल था। इसके अलावा, यह गिरोह वैध डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और कोयला खरीदारों से ‘गुंडा टैक्स’ या ‘रंगदारी टैक्स’ के नाम पर जबरन वसूली करता था।

इस अवैध वसूली को ढुलाई शुल्क, हैंडलिंग चार्ज और अन्य मदों के रूप में छिपाया जाता था। जांच में पाया गया कि यह वसूली 275 रुपए प्रति टन से लेकर 1,500 रुपए प्रति टन तक होती थी, जो कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक थी।

इस संगठित अवैध वसूली के चलते बड़ी मात्रा में आवंटित कोयला बिना उठाए ही रह गया, जिससे ईसीएल को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। पिछले पांच वर्षों में इस सिंडिकेट द्वारा अर्जित ‘अपराध की आय’ (पीओसी) का अनुमान 650 करोड़ रुपए से अधिक लगाया गया है।

जांच के दौरान पीएमएलए की धारा 17 के तहत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों को खंगाला गया। इन तलाशी अभियानों में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, व्हाट्सएप चैट, कोयला परिवहन के रिकॉर्ड, लेवी वसूली से जुड़ी सूचियां और बैंक खातों से संबंधित अहम जानकारी बरामद की गई। 21 नवंबर 2025 और 3 फरवरी 2026 को हुई छापेमारी में लगभग 17.57 करोड़ रुपए की नकदी, बैंक बैलेंस, कीमती सामान और भारी मात्रा में कोयला एवं कोक भी जब्त किया गया।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनियों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का इस्तेमाल किया। बैंक खातों के विश्लेषण से बड़े पैमाने पर नकद जमा और आपस में जुड़े लोगों व संस्थाओं के बीच संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इसके अलावा, सिंडिकेट की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पश्चिम बंगाल के कुछ सरकारी अधिकारियों और स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारियों को रिश्वत दिए जाने के भी साक्ष्य मिले हैं।

बता दें कि आरोपी चिन्मय मंडल और किरण खान को पहले ही 9 फरवरी 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल, इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है, और ईडी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it