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पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों की वापसी को लेकर तथागत रॉय ने भाजपा को किया आगाह

पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा कि हाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी हलचल है

पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों की वापसी को लेकर तथागत रॉय ने भाजपा को किया आगाह
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने शनिवार को कहा कि हाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी हलचल है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति का फायदा उठाकर कम्युनिस्ट पार्टियों को राज्य में अपनी पुरानी राजनीतिक ताकत दोबारा हासिल नहीं करने देना चाहिए।

रॉय ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "भाजपा को यह पक्का करने के लिए सतर्क रहना होगा कि आज तृणमूल कांग्रेस के बिखरने से बने राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर सीपीआई(एम) उसमें घुस न जाए। यह सीधी सी बात कि 'कम्युनिस्ट यानी धोखा' अभी भी हममें से कई लोगों, यानी बंगाली हिंदुओं, की समझ में नहीं आती है।"

उनके मुताबिक, हिंदू कम्युनिस्ट हमेशा मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं। अपनी बात के समर्थन में, उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक हिंदू सीपीआई(एम) नेता का उदाहरण दिया, जो बीफ खाते थे, जबकि एक बड़े मुस्लिम सीपीआई(एम) नेता को कभी भी पोर्क खाते हुए नहीं देखा गया।

रॉय ने पश्चिम बंगाल के आखिरी कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री, स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 में भट्टाचार्य ने बेबाकी से कहा था कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों के कई मदरसों में देश-विरोधी प्रचार किया जा रहा है।

रॉय ने कहा, "उनके बयान सभी अखबारों में छपे थे, जिसमें सीपीआई(एम) का पार्टी मुखपत्र 'गणशक्ति' भी शामिल था। अगले ही दिन, सीपीआई(एम) नेतृत्व के दबाव में भट्टाचार्य को अपना बयान वापस लेना पड़ा।"

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने हाल ही में नॉर्थ 24 परगना जिले के दो मदरसों में जो छापेमारी की, उससे साबित होता है कि उस समय भट्टाचार्य का बयान कितना सच था।

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को सिर्फ एक सीट मिली थी। तब से पार्टी नेतृत्व ने मुद्दों पर आधारित आंदोलन शुरू किए हैं, जैसे कि मौजूदा सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार के तहत हॉकरों (फेरीवालों) को हटाने का विरोध करना।


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