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SIR विवाद पर ममता बनर्जी का EC पर हमला, ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी से लेकर बंगाल में फिर से चुनाव कराने की मांग

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर कार्रवाई की बात कही।

SIR विवाद पर ममता बनर्जी का EC पर हमला, ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी से लेकर बंगाल में फिर से चुनाव कराने की मांग
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कोलकाता: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल समेत उन राज्यों में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है, जहां SIR के बाद चुनाव हुए और भाजपा ने जीत हासिल की। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रखे जाएंगे। हालांकि, ये ममता बनर्जी के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।

ममता बोलीं- यह लोकतंत्र के लिए बड़ी लड़ाई

ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन के सहयोगी जल्द बैठक करेंगे और SIR के मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने दावा किया कि सामने आई मीडिया रिपोर्ट से चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर उठाए गए सवालों का पता चलता है। TMC प्रमुख ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह देश के लिए एक और बड़ी लड़ाई है। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आरोप दोहराते हुए देशभर में आंदोलन की बात कही।

किस रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद?

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में यह सवाल उठाया था कि संबंधित फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा मंजूरी के बिना जारी किए गए। इन दावों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने विस्तृत बयान जारी कर अपनी निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की।

चुनाव आयोग ने कहा- आंतरिक टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया

ECI ने रिपोर्ट में उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव, सवाल और आंतरिक समीक्षा संस्थागत कामकाज का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, किसी फैसले का मसौदा तैयार होने के दौरान सदस्य उसमें बदलाव का सुझाव दे सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या किसी कानूनी और तकनीकी पहलू पर सवाल उठा सकते हैं। आयोग ने कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग से देखने पर संस्थान के पूरे कामकाज की तस्वीर सामने नहीं आती। ECI के अनुसार, पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी फैसले, जिनमें SIR भी शामिल है, पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

भाजपा ने किया चुनाव आयोग का बचाव

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने चुनाव आयुक्तों के बीच हुई चर्चाओं और टिप्पणियों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के सदस्यों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामान्य है। पात्रा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर चुनावों में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग के भीतर विचार-विमर्श को संस्थागत विवाद के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

विपक्ष ने तेज किया हमला

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर कार्रवाई की बात कही। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, TMC सांसद अभिषेक बनर्जी, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं।

दोबारा चुनाव की मांग से बढ़ी राजनीतिक गर्मी

ममता बनर्जी की ओर से पश्चिम बंगाल समेत SIR के बाद चुनाव कराने वाले राज्यों में दोबारा मतदान की मांग ने विवाद को और राजनीतिक रूप दे दिया है। वहीं, चुनाव आयोग लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि उसके फैसले कानून, निर्धारित प्रक्रिया और आयोग की सामूहिक निर्णय व्यवस्था के तहत लिए गए हैं। अब इस पूरे विवाद का केंद्र SIR, आंतरिक चुनावी निर्णय प्रक्रिया और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवाल हैं। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और आगे की संस्थागत अथवा न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।


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