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यूसीसी पर कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी बोले- 'कुछ प्रावधान सकारात्मक पर पूरा बिल पढ़ना बाकी'

कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक बिल को पूरी तरह पढ़ा या देखा नहीं है

यूसीसी पर कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी बोले- कुछ प्रावधान सकारात्मक पर पूरा बिल पढ़ना बाकी
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कोलकाता। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक बिल को पूरी तरह पढ़ा या देखा नहीं है। इसलिए वह इसके सभी प्रावधानों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं कर सकते।

कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके आधार पर कुछ प्रावधान सकारात्मक प्रतीत होते हैं। इसमें विशेष रूप से उस प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है, जिसमें सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों से नुकसान की भरपाई कराने की बात कही गई है। यह कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अच्छा कदम हो सकता है।"

ईशा खान चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा उन फैसलों का समर्थन करेगी, जिनसे आम जनता का हित हो। उनकी पार्टी जनता के साथ खड़ी है और सरकार को विकास, पारदर्शिता तथा जनकल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि प्रस्तावित बिल में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी प्रावधान शामिल किए गए हैं, तो यह स्वागतयोग्य पहल होगी। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि बिल का अध्ययन किए बिना अंतिम राय देना उचित नहीं होगा।

कांग्रेस सांसद ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से पूछा कि जिन विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है, उनके संबंध में पार्टी का क्या रुख रहेगा। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में सामने आए कथित घोटालों की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और विधानसभा में पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

डोला सेन द्वारा बागी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए ईशा खान चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बड़ी टूट हुई है और कई नेताओं ने पार्टी छोड़कर नए राजनीतिक गुट बना लिए हैं। उनका मानना है कि यदि कोई सांसद अपनी विचारधारा बदलता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर दोबारा जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने उन्हें एक विशेष विचारधारा और जनादेश के आधार पर चुना था, इसलिए दल बदलने पर जनता से नया जनादेश लेना लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लोग ऐसे सांसदों के बारे में सवाल उठा रहे हैं और राजनीतिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।


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