कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस्कॉन के मिड-डे मील प्रस्ताव पर बंगाल सरकार से मांगा हलफनामा
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह कोलकाता नगर निगम (केएमसी) क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कांशसनेस (इस्कॉन) को सौंपने के प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति पर एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह कोलकाता नगर निगम (केएमसी) क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कांशसनेस (इस्कॉन) को सौंपने के प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति पर एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।
इस मामले में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रता चक्रबर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि इस प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है। इसके जवाब में राज्य के महाधिवक्ता सूरजित नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि मामला अभी केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी नहीं की गई है।
इसके बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अगले चार सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।
अदालत ने याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया कि सरकार का हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के भीतर वह अपना जवाबी हलफनामा प्रस्तुत करे।
साथ ही, अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रस्ताव के खिलाफ दायर याचिका फिलहाल समय से पहले दायर की गई प्रतीत होती है, क्योंकि राज्य सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सरकार इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करती है तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने की जिम्मेदारी इस्कॉन को दी जाती है तो भोजन में अंडे नहीं परोसे जाएंगे। इससे छात्रों को प्रोटीन युक्त आहार से वंचित होना पड़ सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में मिड-डे मील बनाने का काम करने वाली कई महिलाओं की नौकरी चली जाएगी, यदि पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में यह जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंप दी जाती है।


