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यूपी: सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्ष का हमला, बोले- कानून सभी के लिए समान होना चाहिए

यूपी के सहारनपुर में एक मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शामली में जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी, मुंबई में समाजवादी पार्टी नेता अबू आसिम आजमी और लखनऊ में कांग्रेस नेता असीम वकार ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। नेताओं ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानून और संवैधानिक प्रावधानों का समान रूप से पालन होना चाहिए।

यूपी: सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्ष का हमला, बोले- कानून सभी के लिए समान होना चाहिए
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नई दिल्ली। यूपी के सहारनपुर में एक मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शामली में जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी, मुंबई में समाजवादी पार्टी नेता अबू आसिम आजमी और लखनऊ में कांग्रेस नेता असीम वकार ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। नेताओं ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानून और संवैधानिक प्रावधानों का समान रूप से पालन होना चाहिए।

जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने आरोप लगाया कि सहारनपुर में मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना और शासन के दबाव में की गई। उन्होंने कहा कि पहले संबंधित संपत्ति के मालिकाना हक का निर्धारण होना चाहिए था और इसके बाद प्रभावित पक्ष को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का अवसर दिया जाना चाहिए था। मेरा मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से संविधान और धार्मिक स्थलों से संबंधित कानूनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने 1947 के समय धार्मिक स्थलों की स्थिति बनाए रखने से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी है। अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोगों को मिलकर संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए। कई मामलों में निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है, इसलिए संबंधित पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का अवसर मिलना चाहिए था।

मुंबई में सपा नेता अबू आसिम आजमी ने सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश में कई सरकारी और रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां लोगों को पूजा और नमाज की सुविधा मिलती है। कुछ रक्षा परिसरों में मंदिर और मस्जिद दोनों मौजूद हैं। मौजूदा सरकार धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और इससे मुसलमानों को निशाना बनाए जाने का संदेश जा रहा है। हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है और कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई नया धार्मिक निर्माण नियमों के खिलाफ होता है तो प्रशासन उसे रोक सकता है, लेकिन पुराने धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट और समान कानूनी मानदंड होने चाहिए। धार्मिक स्थलों को लेकर फैसले बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक की इच्छा के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और न्याय के आधार पर होने चाहिए।

लखनऊ में कांग्रेस नेता असीम वकार ने सहारनपुर के जिलाधिकारी से सवाल किया कि यदि मस्जिद को सरकारी जमीन पर बने होने के कारण गिराया गया है, तो पूरे जिले में सरकारी जमीन पर बने सभी धार्मिक स्थलों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए।

वकार ने कहा कि उन्होंने जिलाधिकारी से पूछा है कि जिले में सरकारी जमीन, पार्कों या सड़कों पर कितने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और अन्य धर्मस्थल बने हैं। उनके मुताबिक, यदि प्रशासन सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, तो उसका मानदंड सभी के लिए समान होना चाहिए। प्रशासन को संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप काम करना चाहिए। धार्मिक स्थलों की स्थिति से जुड़े 1947 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पुराने धार्मिक स्थलों के मामले में भी कानूनी संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है।

असीम वकार ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के मौके पर पहुंचने के बाद जिलाधिकारी ने कथित तौर पर केवल सीलिंग की कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन इसके बाद रात में मस्जिद को गिरा दिया गया। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने केवल सील करने की बात कही थी तो ध्वस्तीकरण कैसे हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरते हुए उन्होंने कहा कि सरकार विकास के मुद्दों के बजाय हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को आगे कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होने पर धार्मिक स्थलों से जुड़े सभी मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए।


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