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भक्तों पर गोली चलाने का आदेश देने वालों को रातोंरात राम याद आने लगे : अनुराग ठाकुर

अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस नेताओं के बयान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया

भक्तों पर गोली चलाने का आदेश देने वालों को रातोंरात राम याद आने लगे : अनुराग ठाकुर
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हमीरपुर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस नेताओं के बयान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिनके आदेश पर राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई, अब उन्हें रातोंरात भगवान राम याद आने लगे। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

हमीरपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा सांसद ने कहा कि जब रामसेतु का मुद्दा उठा तो कांग्रेस के किसी भी नेता ने इसके समर्थन में कुछ नहीं कहा। बल्कि, उन्होंने तो यह तक कह दिया कि रामसेतु का कोई अस्तित्व ही नहीं है। कांग्रेस और विपक्ष के अन्य नेताओं ने ही भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान राम भक्तों पर गोलियां चलाने का आदेश देने वाले नेता विपक्ष के ही थे। राम मंदिर पर फैसला आने के बाद भी कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने इसका विरोध जारी रखा। उन्होंने मंदिर की आधारशिला रखने के समारोह से लेकर इसके उद्घाटन तक हर चरण में विरोध किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आज भी राजनीति कर रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट ने सरकार से खुद पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया। सरकार ने एसआईटी गठित की और जांच चल रही है।

भाजपा सांसद ने कहा कि यह वक्त राजनीति करने का नहीं है, जांच रिपोर्ट आएगी और उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उस मछली की तरह है, जो पानी से बाहर होने पर तड़पती है, कांग्रेस सत्ता के बिना तड़प रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्रों में 50 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। उनके लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों का मकसद स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा, दोनों मुहैया कराना है।

उन्होंने कहा कि इन 12 सालों में मोदी सरकार ने संविदा श्रमिकों के अधिकारों एवं लाभों की रक्षा के लिए कई कानून बनाए। देश में 29 सेंट्रल लेबर लॉ थे, जिन्हें हमारी सरकार ने रिफॉर्म कर चार लेबर कोड में तब्दील कर दिया। उनमें से कई ऐसे कानून थे जो मजदूरों और छोटे स्तर पर काम करने वाले संविदाकर्मी के हित में बिल्कुल नहीं थे, न ही उनका वर्तमान सुरक्षित था और न ही भविष्य। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड संविधान की तरह उनके हितों की सुरक्षा करता है।


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