Top
Begin typing your search above and press return to search.

‘सोने की चिड़िया’ भारत में हुनरमंदों को नहीं मिला मंच, यूपी ने लोकल उत्पादों को ग्लोबल पहचान दी: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत कभी दुनिया में ‘सोने की चिड़िया’ के रूप में जाना जाता था। लेकिन देश की शक्तियां विभाजित हुईं तो भारत गुलाम हुआ

‘सोने की चिड़िया’ भारत में हुनरमंदों को नहीं मिला मंच, यूपी ने लोकल उत्पादों को ग्लोबल पहचान दी: योगी
X

ग्रेटर नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत कभी दुनिया में ‘सोने की चिड़िया’ के रूप में जाना जाता था। लेकिन देश की शक्तियां विभाजित हुईं तो भारत गुलाम हुआ। उस कालखंड में सिर्फ देश को ही गुलामी नहीं झेलनी पड़ी, बल्कि यहां के हस्तशिल्प, बुनकरों और पारंपरिक हुनर को भी प्रताड़ित किया गया।

सीएम ने कहा कि आजादी के बाद भी लंबे समय तक इन हुनरमंदों को अपेक्षित मंच नहीं मिला। इससे नई पीढ़ी अपने पारंपरिक व्यवसाय और जड़ों से दूर होने लगी। उत्तर प्रदेश में क्षमता की कोई कमी नहीं थी, जरूरत इस क्षमता को पहचानने की थी।

योगी ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद पारंपरिक उद्यमों को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के जरिए नई पहचान दी गई। डबल इंजन सरकार ने स्थानीय उत्पादों और हुनर की क्षमता को पहचाना और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम किया।

उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए ऐसा नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे यूपी के उत्पाद देश-दुनिया के बाजार तक पहुंच रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट और टूल किट जैसी योजनाएं भी कारीगरों को बाजार से जोड़ने में मदद कर रही हैं।

90 देशों के 500 से ज्यादा खरीदार ट्रेड शो में

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो पिछले चार वर्षों से प्रदेश के उत्पादों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का मंच बना है। इस साल 90 देशों के 500 से ज्यादा खरीदार इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 36 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में 2,400 से ज्यादा प्रदर्शक ट्रेड शो में शामिल हुए हैं। छह देशों की भागीदारी इसके वैश्विक स्वरूप को मजबूत कर रही है। विभिन्न देशों के साथ एमओयू हो चुके हैं और तकनीक व ज्वाइंट वेंचर के क्षेत्र में भी सहयोग की नई संभावनाएं बन रही हैं।

योगी ने कहा कि यूपी के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई पारंपरिक उत्पाद अब करोड़ों रुपये के कारोबार का आधार बन चुके हैं। सरकार का प्रयास इन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़कर उन्हें नई पहचान दिलाना है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it