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इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

मुरादाबाद की मस्जिद को मिले नोटिस को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि किसी भी इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए, चाहे वह मस्जिद हो, मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च ही क्यों न हो।

इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
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बरेली। मुरादाबाद की मस्जिद को मिले नोटिस को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि किसी भी इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए, चाहे वह मस्जिद हो, मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च ही क्यों न हो।

बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इन दिनों मस्जिदों को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। सहारनपुर में एक मस्जिद को अवैध बताते हुए बुलडोजर से गिराया गया और अब मुरादाबाद की मस्जिद मुस्तफा को भी मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया है। इससे एक नया विवाद खड़ा हो रहा है। पहले सहारनपुर में हमारी मस्जिद को गिराया गया और अब मुरादाबाद में भी मस्जिद गिराने की तैयारी चल रही है।

बरेलवी के मुताबिक, "हमारा पक्ष यह है और सिर्फ हमारा ही नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों मुसलमानों का भी मानना है कि किसी भी इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए। चाहे मंदिर हो या मस्जिद, किसी भी इबादतगाह के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उज्जैन के मंदिर के मामले में बुलडोजर चलाने की कार्रवाई में कोई जल्दबाजी नहीं हुई, जबकि सहारनपुर की मस्जिद पर बुलडोजर चलाने में इतनी तेजी दिखाई गई कि सूरज निकलने का भी इंतजार नहीं किया गया और मस्जिद को गिरा दिया गया। यह बेहद अफसोस की बात है। वह किसी भी धार्मिक स्थल पर बुलडोजर की कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। हम नहीं चाहते कि किसी भी इबादतगाह पर बुलडोजर चले, चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या चर्च ही क्यों न हो।

उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा का एक नया संकल्प शुरू किया है, जो भारत सरकार की तरफ से लगातार चल रहा है। यह खिदमत है और खिदमत-ए-खल्क हर इंसान की जिम्मेदारी है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्रधानमंत्री ही सेवा का काम करें, बल्कि भारत में रहने वाले 145 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी है कि वे एक-दूसरे की मदद के लिए खड़े हों और एक-दूसरे के दुख-दर्द में शरीक हों। अगर कहीं किसी पर जुल्म या ज्यादती हो रही है तो उसके साथ खड़े हों और जुल्म को अपने हाथों से रोकें। कोई भूखा है तो उसे खाना खिलाएं, कोई प्यासा है तो उसे पानी पिलाएं, और कोई रास्ते से भटक गया है तो उसे सही दिशा और सही रास्ता दिखाएं। यही असल सेवा है।


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