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बागी विधायकों पर अखिलेश का तंज, बोले सदस्यता की पर्ची से ज्यादा कुछ नहीं मिला

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर तीखा तंज कसा

बागी विधायकों पर अखिलेश का तंज, बोले सदस्यता की पर्ची से ज्यादा कुछ नहीं मिला
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भाजपा में गए विधायकों पर अखिलेश का वार, ‘प्रत्याशी नहीं प्रतीक्षार्थी बनेंगे’

  • दल बदलने वालों पर अखिलेश की शायराना चोट, कहा दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं कंधा
  • सपा छोड़ भाजपा में गए विधायकों को अखिलेश की नसीहत, इंतजार अभी लंबा है
  • बागियों पर अखिलेश का तंज, जिस दल के नहीं हुए उसके भी नहीं होंगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर तीखा तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में दलबदल करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दल के लिए उन्होंने वर्षों तक इंतजार किया, वहां भी उन्हें सदस्यता की पर्ची से अधिक कुछ नहीं मिला।

अखिलेश ने संकेतों में कहा कि ऐसे नेताओं को दूसरे दल में भी राजनीतिक सम्मान और उम्मीदवारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अपने कबीले से जो दगा करता है बंदा, चलता उसके मान पर अपमान का रंदा। कार्यकर्ता बनकर उठाना पड़ता है झंडा, दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं उसका कंधा। सिर झुकाकर करना पड़ता काला धंधा, चुराना पड़ता उसको दान-चढ़ावा-चंदा। अब तक जो कमाया वो नाम होता गंदा।”

उन्होंने आगे लिखा कि वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भी सदस्यता की पर्ची से अधिक कुछ नहीं मिला। जिस दल में गए हैं, उसके पुराने दावेदार कह रहे हैं कि ऐसे लोग तो आते-जाते रहते हैं। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि जिस दल से जीते, उसके नहीं हुए तो जिस दल के सदस्य बनने में सालों लग गए, वहां ‘प्रत्याशी’ नहीं, बल्कि ‘प्रतीक्षार्थी’ बनकर ही कई साल रहेंगे।

बता दें कि बुधवार को समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।


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