सीजेपी नेताओं की रिहाई की मांग, नवीन पटनायक बोले- राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर लंबी हिरासत उचित नहीं
ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मंगलवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास का समर्थन किया।

भुवनेश्वर। ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मंगलवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास का समर्थन किया। उन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत से तुरंत रिहा करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करें और कानून के शासन पर युवाओं का भरोसा बनाए रखें।
पटनायक ने मंगलवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, "आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें बिना देरी के रिहा किया जाना चाहिए। प्रतिबंधित इलाके में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए इतनी लंबी हिरासत नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका और कार्यपालिका को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों से भरोसा न उठे।"
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर (जो अब विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत जगह नहीं है) में निजी परिसर के रास्ते से प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के आरोप में हिरासत में लिए गए 14 लोगों में रांका और दास भी शामिल थे।
इस मामले के सिलसिले में, 14 अक्टूबर को सीजेपी के दो नेताओं को शुरुआती तौर पर पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
वे मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए थे।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ऋतु राज ने सोमवार को दास और रांका की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके बर्ताव से "कानून के प्रति कोई सम्मान" नहीं दिखता और इससे पता चलता है कि "प्रतिबंधित (डी-नोटिफाइड) इलाकों में विरोध प्रदर्शन करना उनकी आदत" बन गई है।
अपने आदेश में, मजिस्ट्रेट ने कहा कि इन दोनों व्यक्तियों ने जानबूझकर उन बॉन्ड का उल्लंघन किया है, जो उन्होंने 11 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के एसईएम के समक्ष भरे थे। इसके बाद, उन्होंने मौजूदा मामले में शांति भंग की है।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि सीजेपी के दोनों नेताओं ने बहस के दौरान यह भरोसा दिलाया था कि वे अपराध को नहीं दोहराएंगे, लेकिन उनके पिछले बर्ताव और जांच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों को देखते हुए, उनके इस आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।


