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तेलंगाना विधानसभा सत्र के बाद सिंचाई परियोजनाओं को लेकर आंदोलन की अगुवाई करेंगे केसीआर

सोमवार से शुरू हो रहे तेलंगाना विधानसभा सत्र के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर), कालेश्वरम और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के प्रति कांग्रेस सरकार की 'लापरवाही' के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा सत्र के बाद सिंचाई परियोजनाओं को लेकर आंदोलन की अगुवाई करेंगे केसीआर
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हैदराबाद। सोमवार से शुरू हो रहे तेलंगाना विधानसभा सत्र के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर), कालेश्वरम और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के प्रति कांग्रेस सरकार की 'लापरवाही' के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे।

पार्टी ने यह घोषणा रविवार को एर्रावल्ली में अपने फार्महाउस पर केसीआर की अध्यक्षता में हुई बीआरएस विधायक दल की बैठक के बाद की।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए, विधानसभा में बीआरएस के उप-नेता टी. हरीश राव ने आरोप लगाया कि कालेश्वरम परियोजना में पानी उपलब्ध होने के बावजूद, कांग्रेस सरकार जानबूझकर पानी नहीं उठा रही है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है।

पालमुरु-रंगारेड्डी परियोजना के बारे में उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार ने परियोजना का 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया था और बाकी काम पूरा होने पर 60 टीएमसी पानी मिलता, लेकिन कांग्रेस सरकार ने बदले की भावना से इसे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि हमने इस बैठक में फैसला किया है कि इन दो परियोजनाओं के प्रति कांग्रेस सरकार के लापरवाह रवैये के विरोध में केसीआर खुद आने वाले दिनों में लाखों लोगों को शामिल करते हुए एक सीधे जन-आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

हरीश राव ने घोषणा की कि बीआरएस विधानसभा में कई मुद्दों पर सरकार का सामना करेगी—जैसे सेक्शन 22ए के तहत खेती की जमीनों को 'निषिद्ध सूची' में डालकर किसानों को परेशान करना, बिजली कटौती, लोन माफी योजना की विफलता, पॉलिटेक्निक जीओ 97 को रद्द करना, सिंगरेनी घोटाले, और पीआरसी, डीए व ईएचएस से जुड़ी नाकामियां।

उन्होंने विधानसभा सत्र में शामिल न होने को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी द्वारा केसीआर की आलोचना को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जिस तरह की भद्दी और सड़क-छाप भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसे सुनने के लिए केसीआर को विधानसभा में जाने की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने बताया कि अतीत में जब एनटीआर, जयललिता और चंद्रबाबू जैसे नेताओं का विधानसभा में अपमान हुआ था, तो उन्होंने सदन का बहिष्कार किया, जनता का जनादेश हासिल किया और मुख्यमंत्री बनकर लौटे। उन्होंने कहा कि केसीआर भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

हरीश राव ने कहा कि रेवंत रेड्डी, जो विपक्ष के नेता की सुरक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं, वे अपने ही भाई तिरुपति रेड्डी को चार गनमैन देने के लिए 40 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं—जबकि उनके भाई के पास वार्ड सदस्य का पद भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि पार्टी विधानसभा में 30 लाख छात्रों की फीस रिइम्बर्समेंट (शुल्क प्रतिपूर्ति) की बकाया राशि का मुद्दा उठाएगी।

उन्होंने कांग्रेस सरकार को चुनौती दी कि वह जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए एक महीने तक विधानसभा सत्र बुलाए। बीआरएस, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में इस बात की पुरजोर मांग करेगी।

केसीआर के इस्तीफे की कांग्रेस पार्टी की मांग पर हरीश राव ने कहा कि रेवंत रेड्डी को पहले 'छह गारंटियों' और कृषि ऋण माफी के वादे से मुकरने के लिए इस्तीफा देना चाहिए।


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