विश्वजीत मोरे ने जीता 'ऐतिहासिक' सिल्वर मेडल
लास वेगास, भारतीय पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने गुरुवार को अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ग्रीको-रोमन कैटेगरी में भारत के लिए पहला सिल्वर मेडल जीता।

लास वेगास, भारतीय पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने गुरुवार को अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ग्रीको-रोमन कैटेगरी में भारत के लिए पहला सिल्वर मेडल जीता। अंडर-23 वर्ल्ड लेवल पर दो बार ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके मोरे पुरुषों के 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन फाइनल के आखिरी पलों में जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे से 12-13 से हार गए। मोरे अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाले भारत के एकमात्र ग्रीको-रोमन पहलवान हैं। वह मंगलवार को अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल तक पहुंचने वाले भारत के पहले ग्रीको-रोमन पहलवान भी बने थे।
उन्होंने तीन कड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मेक्सिको के इसाक मारिन माटा को 10-8 से हराकर अपने अभियान की शुरुआत की, जिससे क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला ईरान के अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन आर्मिन शमसीपौर से हुआ। शमसीपौर के कंधे में चोट लग गई थी, और मोरे ने एक 'फोर-पॉइंटर थ्रो' (चार अंक दिलाने वाला दांव) का इस्तेमाल करते हुए उन्हें 8-1 से हरा दिया।
रूस के मलिक गिगिएव के खिलाफ सेमीफाइनल भी काफी रोमांचक रहा, जिसमें दोनों पहलवानों को 'चैलेंज' (रेफरी के फैसले को चुनौती देने का मौका) का फायदा मिला। अंत में मोरे ने 6-4 से जीत दर्ज की। मोरे फाइनल में इस लक्ष्य के साथ उतरे थे कि वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप की ग्रीको-रोमन स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बनेंगे। हालांकि, वह फाइनल में जॉर्जिया के पहलवान से हार गए और उनका गोल्ड जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका। जॉर्जियाई पहलवान ने भी फाइनल में जगह बनाने के लिए सेमीफाइनल में किर्गिस्तान के बार्सबेक असनकोझोएव को कड़े मुकाबले में हराया था।
हालांकि, इससे पहले भारत के अभियान को एक प्रशासनिक बाधा का सामना करना पड़ा था। अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप (लास वेगास) के लिए भारत के नौ पहलवानों (ग्रीको-रोमन और महिला कुश्ती कैटेगरी से) को वीजा नहीं मिला, क्योंकि वे 20 साल से कम उम्र के थे और उनके पास कोई फुल-टाइम नौकरी नहीं थी।
डब्ल्यूएफआई प्रमुख संजय सिंह ने बुधवार को आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा था, "अमेरिकी दूतावास ने नौ भारतीय पहलवानों के वीजा इस आधार पर खारिज कर दिए कि वे बेरोजगार हैं। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। यहां तक कि यूडब्ल्यूडब्ल्यू के अध्यक्ष ने भी इस मामले को लेकर उन्हें पत्र लिखा था। वीजा खारिज होना पूरी तरह से अमेरिकी दूतावास की गलती है, और इसके परिणामस्वरूप भारत को गोल्ड मेडल गंवाने पड़े। जिन नौ पहलवानों को वीजा नहीं मिला, उनमें से कम से कम दो ऐसे थे जो गोल्ड मेडल जीतने के प्रबल दावेदार थे। अमेरिकी दूतावास की गलती के कारण भारत को पदकों का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।"


