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वेदा कृष्णमूर्ति : यह मैच आंखें खोलने वाला रहा

नई दिल्ली, पूर्व भारतीय महिला क्रिकेटर वेदा कृष्णमूर्ति का मानना है कि टी20 सीरीज के पहले मैच में जिम्बाब्वे के स्पिनर्स के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का जल्दी आउट होना टीम के लिए एक बड़ा सबक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों को इस प्रदर्शन से सीख लेकर अगले मैच में बेहतर तैयारी के साथ उतरना होगा।

वेदा कृष्णमूर्ति : यह मैच आंखें खोलने वाला रहा
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नई दिल्ली, पूर्व भारतीय महिला क्रिकेटर वेदा कृष्णमूर्ति का मानना है कि टी20 सीरीज के पहले मैच में जिम्बाब्वे के स्पिनर्स के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का जल्दी आउट होना टीम के लिए एक बड़ा सबक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों को इस प्रदर्शन से सीख लेकर अगले मैच में बेहतर तैयारी के साथ उतरना होगा।

वेदा के अनुसार, भारतीय टीम को यह समझना होगा कि किसी भी विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि रविवार को होने वाले दूसरे टी20 मैच में भारतीय बल्लेबाज अपनी गलतियों को सुधारेंगे और स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ ज्यादा जिम्मेदारी के साथ खेलेंगे।

शुक्रवार को शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में जिम्बाब्वे से मिले 115 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 19/4 की खराब स्थिति से उबरते हुए लक्ष्य को 15.4 ओवर में 26 गेंदें शेष रहते हुए हासिल किया। दीप्ति ने 49 रन बनाए, जबकि निकी प्रसाद 39 रन बनाकर नाबाद रहीं। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है।

वेदा के अनुसार, भारतीय बल्लेबाजों को धीमे गेंदबाजों के हिसाब से ढलने में समय लगा। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से उन्हें अगले मैच के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने 'जियो स्टार' से कहा, "भारत ने शुरुआत में ही कुछ विकेट गंवा दिए थे। धीमे गेंदबाजों के खिलाफ ढलने में समय लगता है, और ठीक ऐसा ही हुआ। भारतीय बल्लेबाज आमतौर पर तेज गति की गेंदों का सामना करने के लिए अभ्यास करती हैं, क्योंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों के खिलाफ खेलना होता है। हालांकि, यह मैच भारतीय बल्लेबाजों के लिए आंखें खोलने वाला रहा। टॉप-ऑर्डर की खिलाड़ियों की काबिलियत पर कोई शक नहीं है, लेकिन मुझे यकीन है कि अगले मैच में वे कहीं बेहतर तैयारी के साथ उतरेंगी।"

कप्तान स्मृति मंधाना द्वारा पहले ओवर में दो चौके लगाने के बाद भारत का टॉप-ऑर्डर लड़खड़ा गया। न्याशा ग्वांज़ुरा ने मंधाना और अनुष्का शर्मा को आउट किया, जबकि मिशेल मावुंगा ने हरमनप्रीत कौर को पवेलियन भेजा। इसके बाद शेफाली वर्मा भी न्याशा का शिकार बनीं, जिससे भारत चार ओवर के भीतर ही 19/4 की नाजुक स्थिति में आ गया।

इसके बाद दीप्ति और निकी ने पांचवें विकेट के लिए 63 गेंदों पर 82 रनों की साझेदारी की और भारत को एक बड़ी हार से बचाया। वेदा ने अनुभवी दीप्ति की तारीफ की, जिन्होंने मुश्किल समय में जिम्मेदारी संभाली और अपना पहला मैच खेल रहीं निकी को क्रीज पर जमने का मौका दिया।

उन्होंने कहा, "यह एक बेहतरीन साझेदारी थी। खासकर जब विकेट गिर रहे हों, तब आपको ऐसे अनुभवी खिलाड़ी की जरूरत होती है जो आकर जिम्मेदारी संभाले। दीप्ति शर्मा एक बहुत ही बहुमुखी बल्लेबाज हैं, और उनका बाएं-दाएं हाथ का संयोजन गेंदबाजों को भी उलझन में डाल देता है। दीप्ति ने जिस आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की, उससे निकी प्रसाद को समय मिल गया कि वह स्थिति को समझ सकें।"

पूर्व भारतीय महिला क्रिकेटर ने आगे कहा, "दीप्ति ने सारा दबाव खुद पर ले लिया और गेंदबाजों पर हावी रहीं, जिससे निकी के लिए बीच के ओवरों में अपनी पारी को आगे बढ़ाना आसान हो गया। दीप्ति शर्मा और निकी प्रसाद दोनों ने पिछले कुछ वर्षों में काफी घरेलू क्रिकेट खेला है, जिससे उन्हें गेंदबाजों और ऐसी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने में मदद मिलती है।" दीप्ति अपनी अर्धशतक से सिर्फ एक रन दूर रह गईं, लेकिन निकी डटी रहीं और 39 रन बनाकर नाबाद रहीं। उन्होंने एक बाउंड्री के साथ टीम को जीत दिलाई। अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में 20 वर्षीय निकी ने जिस संयम का परिचय दिया, उससे वेदा काफी प्रभावित हुईं।

निकी की प्रशंसा करते हुए वेदा ने कहा, "निकी प्रसाद ने एक बल्लेबाज और क्रिकेटर के तौर पर शानदार प्रदर्शन किया। वह अभी सिर्फ 20 साल की हैं लेकिन उनमें एक परिपक्व और अनुभवी खिलाड़ी जैसा संयम है। यही वजह है कि वह दबाव को संभाल सकीं और ऐसी पारी खेल पाईं। मुझे उनका महिला प्रीमियर लीग डेब्यू भी याद आता है, जहां वह बिल्कुल ऐसी ही स्थिति में बल्लेबाजी करने उतरी थीं और शानदार शुरुआत की थी। भारत के टॉप ऑर्डर को देखते हुए, शायद उन्हें लगा होगा कि उन्हें बाद में बल्लेबाजी करने का मौका मिलेगा, लेकिन हालात बहुत तेजी से बदल गए। जब ​​चीजें इतनी तेजी से बदलती हैं, तो बल्लेबाज के पास ज्यादा सोचने का समय नहीं होता। ऐसे में उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि उस समय क्या करने की जरूरत है।"


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