ऋषभ पंत को अपने 50वें टेस्ट पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर से मिली सलाह, बदले-बदले दिखे
अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच की तैयारियों के दौरान भारतीय टीम के अभ्यास सत्र में वह पहले की तुलना में अधिक संयमित और जिम्मेदार नजर आए। नेट्स पर बल्लेबाजी करते समय उनका ध्यान केवल आक्रामकता पर नहीं बल्कि तकनीक और धैर्य पर भी केंद्रित दिखाई दिया।

मुल्लांपुर : भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अपने आक्रामक खेल और बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। मैदान पर उनके बड़े शॉट और जोखिम उठाने की शैली अक्सर दर्शकों को रोमांचित करती है। लेकिन अपने 50वें टेस्ट मैच से पहले पंत का एक अलग ही रूप देखने को मिला है। अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच की तैयारियों के दौरान भारतीय टीम के अभ्यास सत्र में वह पहले की तुलना में अधिक संयमित और जिम्मेदार नजर आए। नेट्स पर बल्लेबाजी करते समय उनका ध्यान केवल आक्रामकता पर नहीं बल्कि तकनीक और धैर्य पर भी केंद्रित दिखाई दिया। खासकर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उन्होंने मजबूत रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया, जो उनके स्वाभाविक अंदाज से कुछ अलग माना जा रहा है।
गौतम गंभीर की सलाह का दिख रहा असर
टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की मौजूदगी में पंत के अभ्यास सत्र को काफी ध्यान से देखा गया। माना जा रहा है कि हाल के कुछ मैचों में उनके शॉट चयन को लेकर उठे सवालों के बाद टीम प्रबंधन ने उनसे अधिक जिम्मेदारी के साथ खेलने की अपेक्षा की है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले टेस्ट मुकाबले में पंत के कुछ शॉट्स और उनके आउट होने के तरीके की काफी चर्चा हुई थी। कई क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों ने उस समय कहा था कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी होने के नाते उन्हें परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करनी चाहिए। माना जाता है कि इन घटनाओं के बाद टीम प्रबंधन और पंत के बीच खेल को लेकर गंभीर चर्चा हुई है। अभ्यास के दौरान भी गंभीर की नजरें लगातार पंत पर बनी रहीं, जिससे यह संकेत मिला कि टीम उनके खेल में कुछ सकारात्मक बदलाव देखना चाहती है।
नेतृत्व केवल पद से नहीं आता
भारतीय टीम के सहायक कोच रेयान टेन डोएशे ने भी पंत के रवैये और भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि पंत टीम में एक वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते हैं और उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। टेन डोएशे के अनुसार, उन्होंने हाल ही में पंत और गौतम गंभीर के बीच हुई बातचीत को सुना था, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई कि एक सीनियर खिलाड़ी को टीम के भीतर किस तरह का व्यवहार और दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। बातचीत में केवल प्रदर्शन ही नहीं बल्कि संवाद, टीम संस्कृति और मैदान पर व्यवहार जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हुई। सहायक कोच का मानना है कि नेतृत्व के लिए हमेशा कोई आधिकारिक पद जरूरी नहीं होता। उनके अनुसार, अनुभवी खिलाड़ी अपने प्रदर्शन और आचरण से भी टीम का नेतृत्व कर सकते हैं, और पंत इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं।
परिस्थितियों के अनुरूप खेल की उम्मीद
टीम प्रबंधन यह नहीं चाहता कि ऋषभ पंत अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली को पूरी तरह बदल दें। आखिरकार यही शैली उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल करती है। हालांकि टीम चाहती है कि वह मैच की स्थिति को बेहतर ढंग से समझते हुए अपने खेल में संतुलन लाएं। टेन डोएशे ने स्पष्ट किया कि टीम पंत की प्रतिभा पर किसी तरह की रोक नहीं लगाना चाहती। उन्होंने कहा कि पंत की सबसे बड़ी ताकत उनका सकारात्मक और निडर दृष्टिकोण है, लेकिन यदि वह कुछ मौकों पर परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल को ढाल सकें तो यह उनके और टीम दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उनका मानना है कि बड़े खिलाड़ियों की पहचान केवल आक्रामकता से नहीं बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता से भी होती है।
50वें टेस्ट में रहेगा खास ध्यान
अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला ऋषभ पंत के करियर का 50वां टेस्ट मैच होगा। यह उपलब्धि किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और ऐसे मौके पर उनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है। पंत ने पिछले कुछ वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेली हैं और विदेशी परिस्थितियों में भारत को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाने में योगदान दिया है। ऐसे में उनके 50वें टेस्ट को लेकर प्रशंसकों की उत्सुकता भी काफी बढ़ गई है।
टीम को चाहिए संतुलित ऋषभ पंत
भारतीय टीम प्रबंधन का संदेश साफ है—ऋषभ पंत की आक्रामकता टीम की ताकत है, लेकिन उसमें परिस्थितियों के अनुसार संयम और जिम्मेदारी का समावेश उन्हें और अधिक प्रभावी खिलाड़ी बना सकता है। अभ्यास सत्र में दिखाई दिया उनका बदला हुआ दृष्टिकोण इस बात का संकेत है कि वह अपने खेल के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि 50वें टेस्ट मैच में पंत अपने नए संयम और पुरानी आक्रामकता के बीच कितना बेहतर संतुलन बना पाते हैं। यही संतुलन उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में और मजबूती से स्थापित कर सकता है।


