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एशियन गेम्स में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में निभाई अहम भूमिका: रोमियो जेम्स

नई दिल्ली, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर रोमियो जेम्स का करियर उपलब्धियों से भरा रहा।

एशियन गेम्स में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में निभाई अहम भूमिका: रोमियो जेम्स
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नई दिल्ली, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर रोमियो जेम्स का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। बतौर खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में भी खूब नाम कमाया। 1982 में हुए एशियन गेम्स में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में रोमियो ने अहम किरदार निभाया।

रोमियो जेम्स का जन्म 15 सितंबर, 1958 को हुआ। रोमियो को शुरुआत से ही हॉकी से खास लगाव था। वह बचपन में ही इस खेल की जमकर प्रैक्टिस किया करते थे और जल्द ही उन्होंने हॉकी में करियर बनाने की ठान ली। घरेलू टूर्नामेंट्स में रोमियो का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा। उन्होंने 1982 से 1985 के बीच सर्विसेज की कप्तानी भी की और तीन बार नेशनल हॉकी चैंपियनशिप का खिताब भी अपने नाम किया। घरेलू से लेकर इंटरनेशनल स्तर तक रोमियो का प्रदर्शन यादगार रहा और उन्होंने अपने प्रदर्शन से खूब वाहवाही बटोरी।

1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे और उन्होंने टूर्नामेंट में बेहतरीन गोलकीपिंग करते हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 1984 में हुए लॉस एंजिल्स ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी रोमियो ने अपनी शानदार गोलकीपिंग से छाप छोड़ी। भारत ने इस टूर्नामेंट का अंत पांचवें स्थान पर रहते हुए किया।

खिलाड़ी के बाद रोमियो जेम्स का कोचिंग करियर भी शानदार रहा। वह 1994 में एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ में शामिल रहे। इसके साथ ही विश्व कप 2010 में भी उन्होंने बतौर कोच अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय हॉकी टीम को आकार देने में भी महत्वपूर्ण रोल अदा किया। उनकी देखरेख में कई युवा गोलकीपर उभरे, जिन्होंने विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर उतरकर भारतीय हॉकी के लिए कई शानदार खिलाड़ी तैयार किए। साल 2015 में रोमियो को हॉकी के खेल में बतौर खिलाड़ी और कोच अहम योगदान के लिए 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित भी किया गया।


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