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जरनैल सिंह : सिर में छह टांके लगने के बावजूद मैदान पर उतरे थे

नई दिल्ली, भारतीय फुटबॉल के जब दिग्गज खिलाड़ियों का नाम लिया जाता है, तो इस लिस्ट में जरनैल सिंह का भी जिक्र जरूर किया जाता है। 1950-60 में भारतीय फुटबॉल टीम के स्वर्णिम युग में जरनैल सिंह का प्रदर्शन कमाल का रहा।

जरनैल सिंह : सिर में छह टांके लगने के बावजूद मैदान पर उतरे थे
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नई दिल्ली, भारतीय फुटबॉल के जब दिग्गज खिलाड़ियों का नाम लिया जाता है, तो इस लिस्ट में जरनैल सिंह का भी जिक्र जरूर किया जाता है। 1950-60 में भारतीय फुटबॉल टीम के स्वर्णिम युग में जरनैल सिंह का प्रदर्शन कमाल का रहा।

पंजाब में जन्मे जरनैल सिंह अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते थे। वह स्टॉपर बैक की पोजीशन पर खेलते थे और अपने दमदार प्रदर्शन से किसी भी मैच का रुख पलटने के लिए मशहूर थे। जरनैल की लंबाई छह फीट के करीब थे और वह मैच की स्थिति को पढ़ने में माहिर थे। 1962 में हुए एशियन गेम्स में जरनैल ने भारतीय टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

जरनैल ने सेमीफाइनल और फिर फाइनल मैच में भारत के लिए गोल दागते हुए टीम को गोल्ड मेडल दिलाया था। साउथ वियतनाम के खिलाफ हुए सेमीफाइनल मुकाबले में जरनैल के सिर पर चोट लग थी, जिसके बाद उनके सिर में छह टांके लगाए थे। दर्द में होने के बावजूद, जरनैल टीम को जीत दिलाने की खातिर मैदान पर उतरे थे और उन्होंने भारत के लिए गोल भी किया। वहीं, साउथ कोरिया के खिलाफ फाइनल में भी जरनैल अपने प्रदर्शन से छाप छोड़ने में सफल रहे थे। जरनैल 1965 से लेकर 167 तक भारतीय नेशनल फुटबॉल टीम के कप्तान भी रहे और उनकी अगुवाई में टीम ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।

जरनैल एशियाई ऑल स्टार टीम में जगह पाने वाले इकलौते भारतीय खिलाड़ी रहे और उन्हें इस टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया। वह लंबे समय तक मोहान बागान फुटबॉल क्लब से भी जुड़े रहे। इसके साथ ही 1960 में हुए ओलंपिक में भी वह भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे। भारतीय फुटबॉल में अहम योगदान देने के लिए उन्हें साल 1964 में 'अर्जुन पुरस्कार' से भी नवाजा गया। जरनैल सिंह का निधन अस्थमा बीमारी के चलते 13 अक्टूबर, 2000 को कनाडा में हुआ। वह अपने बेटे से मिलने के लिए कनाडा गए हुए थे।


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