Top
Begin typing your search above and press return to search.

ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज

नई दिल्ली, देश के स्टार मुक्केबाज विजेंदर सिंह 29 अक्टूबर (गुरुवार) को अपना 41वां जन्मदिन मनाएंगे। अपने जोरदार पंच से दुनियाभर के मुक्केबाजों को परेशान करने वाले विजेंदर ने सिनेमा और राजनीति के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया है।

ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज
X

नई दिल्ली, देश के स्टार मुक्केबाज विजेंदर सिंह 29 अक्टूबर (गुरुवार) को अपना 41वां जन्मदिन मनाएंगे। अपने जोरदार पंच से दुनियाभर के मुक्केबाजों को परेशान करने वाले विजेंदर ने सिनेमा और राजनीति के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया है।

विजेंदर सिंह का पूरा नाम विजेंदर सिंह बेनीवाल है। उनका जन्म 29 अक्टूबर 1985 को हरियाणा के कालुवास गांव में हुआ था। उनके पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज में बस ड्राइवर थे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। विजेंदर का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं था। परिवार को आर्थिक संपन्नता दिलाने के लिए उन्होंने मुक्केबाजी के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। उनका यह फैसला सही साबित हुआ।

विजेंदर को अपने बड़े भाई मनोज, जो खुद एक मुक्केबाज रहे थे, से इस खेल की प्रेरणा मिली थी। 1998 में बॉक्सिंग की बदौलत मनोज ने इंडियन आर्मी में नौकरी हासिल की और उसके बाद विजेंदर को आर्थिक रूप से सहयोग करने का फैसला किया। विजेंदर हैं स्नातक हैं, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी उन पर पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया। उन्हें लगा कि विजेंदर में प्रतिभा और पैशन है।

उन्होंने भिवानी बॉक्सिंग क्लब में प्रशिक्षण लिया, जहां पूर्व राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज और प्रशिक्षक जगदीश सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। विजेंदर ने 1997 में अपने पहले सब-जूनियर नेशनल में रजत पदक जीता और 2000 के नेशनल्स में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। 2003 में, वे अखिल भारतीय युवा मुक्केबाजी चैंपियन बने। इस सफलता ने एक मुक्केबाज के तौर पर उनके सुनहरे करियर की शुरुआत कर दी।

विजेंदर ने 2004 के एथेंस समर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया था, लेकिन वे तुर्की के मुस्तफा करागोलू से 20-25 के स्कोर से हार गए थे। 2008 में बीजिंग ओलंपिक में मुक्केबाजी में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता और ओलंपिक में इस खेल में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद उन्होंने 2009 वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल और 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल भी जीता।

जून 2015 में, विजेंदर सिंह प्रोफेशनल बन गए। इस वजह से वह रियो ओलंपिक 2016 का हिस्सा नहीं बन सके। प्रोफेशनल के तौर पर उन्हें बड़ी सफलता मिली है।

2008 ओलंपिक की सफलता ने विजेंदर को बड़ी लोकप्रियता दी थी। इसका फायदा उन्हें फिल्म और विज्ञापन जगत में मिला। वे बड़े पर्दे नजर आए। 2014 में उनकी फिल्म फुगली और 2023 में किसी का भाई किसी का जान रिलीज हुई थी।

खेल और फिल्म के बाद विजेंदर राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। 2019 लोकसभा चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

मुक्केबाजी के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें विजेंदर सिंह को भारत सरकार द्वारा 'अर्जुन पुरस्कार' और 'राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2010 में पद्मश्री सम्मान भी मिला था।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it