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100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप गावित ने जीता गोल्ड

नागोया, एशियन पैरा गेम्स की पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत ने एक और यादगार प्रदर्शन किया। दिलीप गावित (टी46 वर्ग) ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया, जबकि मोहम्मद बेसिल मोर्सिंगनाकाथी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप गावित ने जीता गोल्ड
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नागोया, एशियन पैरा गेम्स की पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत ने एक और यादगार प्रदर्शन किया। दिलीप गावित (टी46 वर्ग) ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया, जबकि मोहम्मद बेसिल मोर्सिंगनाकाथी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

दिलीप गावित (टी46 कैटेगरी) ने 10.69 सेकंड के शानदार समय के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, बेसिल (टी47 कैटेगरी) ने 10.72 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता और इस स्पर्धा में एक नया 'गेम्स रिकॉर्ड' भी बनाया।

इन दोनों खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जैसा ही प्रदर्शन दोहराया, जहां दिलीप गावित ने मेंस 100 मीटर टी47 इवेंट में 'गेम्स रिकॉर्ड' के साथ गोल्ड मेडल जीता था, जबकि बेसिल मोर्सिंगनाकाथी ने सिल्वर मेडल हासिल करके भारत के लिए 1-2 की शानदार जीत पक्की की थी।

इससे पहले, दिलीप गावित एशियन पैरा गेम्स 2022 में मेंस 400 मीटर टी47 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था, जो इन खेलों में भारत का ऐतिहासिक 100वां मेडल था। उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक्स में भी पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा के फाइनल में पहुंचकर देश को गौरवान्वित किया।

महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित तोरण डोंगारी नामक गांव में जन्मे दिलीप गावित एक साधारण किसान परिवार में पले-बढ़े। उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब 5-6 साल की उम्र में वे एक पेड़ से गिर गए, जिससे उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लग गई।

समय पर इलाज न मिल पाने के कारण, चोट वाली जगह पर गैंग्रीन हो गया, जिसके चलते उनके हाथ को कोहनी के नीचे से काटना पड़ा। इतने बड़े झटके के बावजूद, गावित ने इसे अपने भविष्य पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने पैरा-एथलेटिक्स में अपना करियर बनाकर दौड़ने के अपने जुनून को पूरा किया। अपने गांव की धूल भरी सड़कों पर अभ्यास करते हुए, उनकी प्रतिभा को बाद में कोच वैजनाथ काले ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें पेशेवर पैरा-एथलेटिक्स की राह दिखाई।


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