Top
Begin typing your search above and press return to search.

तीरंदाजी विश्व कप : धीरज बोम्मादेवरा ने रचा इतिहास

साल्टिलो (मेक्सिको), जयंत तालुकदार के विश्व कप फाइनल में पदक जीतने के 16 साल बाद भारत को पुरुष रिकर्व वर्ग में फिर से बड़ी सफलता मिली है। धीरज बोम्मादेवरा ने बेहद दबाव भरे शूट-ऑफ में शानदार संयम दिखाते हुए जीत हासिल की। इसके साथ ही वह तीरंदाजी विश्व कप फाइनल का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं।

तीरंदाजी विश्व कप : धीरज बोम्मादेवरा ने रचा इतिहास
X

साल्टिलो (मेक्सिको), जयंत तालुकदार के विश्व कप फाइनल में पदक जीतने के 16 साल बाद भारत को पुरुष रिकर्व वर्ग में फिर से बड़ी सफलता मिली है। धीरज बोम्मादेवरा ने बेहद दबाव भरे शूट-ऑफ में शानदार संयम दिखाते हुए जीत हासिल की। इसके साथ ही वह तीरंदाजी विश्व कप फाइनल का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं।

दुनिया के नंबर 10 तीरंदाज और सेना के 25 वर्षीय खिलाड़ी धीरज ने साल्टिलो में हुए रोमांचक फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को 6-5 से हराया। पांच सेट के बाद मुकाबला 5-5 से बराबरी पर था, जिसके बाद शूट-ऑफ में धीरज ने 10 का स्कोर किया, जबकि नाकानिशी ने 9 का स्कोर किया और धीरज ने गोल्ड मेडल अपने नाम करने में सफल रहे।

यह सफलता धीरज के लिए और भी खास रही, क्योंकि पिछले दो तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में वह पदक नहीं जीत पाए थे। 2023 और 2024 में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। हालांकि, इस बार उन्होंने नॉकआउट मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया और फाइनल में दुनिया के 20वें नंबर के तीरंदाज नाकानिशी का सामना किया।

फाइनल में कोई भी तीरंदाज हार मानने को तैयार नहीं था। पांच सेटों में स्कोर 28-28, 28-29, 29-28, 28-30 और 28-27 रहा, जिससे गोल्ड मेडल का फैसला बहुत कम अंतर से हुआ। धीरज की जीत ने इस प्रतिष्ठित सीजन-एंडिंग इवेंट में भारत का रिकॉर्ड भी बदल दिया। तालुकदार ने पहले 2010 में एडिनबर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था, लेकिन टूर्नामेंट की शुरुआत से अब तक कोई भी भारतीय पुरुष गोल्ड मेडल नहीं जीत पाया था।

भारत की एकमात्र अन्य व्यक्तिगत विश्व कप फाइनल चैंपियन डोला बनर्जी हैं, जिन्होंने 2007 में दुबई में महिलाओं का खिताब जीता था। इसलिए, धीरज की जीत बनर्जी की 19 साल पहले की सफलता के बाद भारत का पहला विश्व कप फाइनल गोल्ड मेडल है। यह उपलब्धि ऐसे टूर्नामेंट में मिली है जहां दीपिका कुमारी भारत की सबसे सफल तीरंदाज बनी हुई हैं। उन्होंने आठ बार हिस्सा लेते हुए छह विश्व कप फाइनल मेडल जीते हैं, जिसमें 5 सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल शामिल है। हालांकि, धीरज के लिए साल्टिलो का मतलब अपना खुद का रिकॉर्ड बनाना था। इससे पहले दो बार बिना मेडल के लौटने के बाद, आर्मी के इस तीरंदाज ने आखिरकार अपने तीसरे वर्ल्ड कप फाइनल में हिस्सा लेते हुए अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it