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आज का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद खास है यह दिन

नई दिल्ली, हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ करना हो, यात्रा पर जाना हो या फिर किसी नए काम की शुरुआत करनी हो, इन सभी के लिए पंचांग देखा जाता है। पंचांग के जरिए दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ-साथ शुभ-अशुभ समय की जानकारी मिलती है।

आज का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद खास है यह दिन
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नई दिल्ली, हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ करना हो, यात्रा पर जाना हो या फिर किसी नए काम की शुरुआत करनी हो, इन सभी के लिए पंचांग देखा जाता है। पंचांग के जरिए दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ-साथ शुभ-अशुभ समय की जानकारी मिलती है।

पंचांग के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।

इस दिन द्वादशी तिथि रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र सुबह 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। वहीं, शोभन योग शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। करण में बव करण दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।

पंचांग में शुभ और अशुभ समय का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में मांगलिक कार्य शुरू करना अच्छा रहता है। वहीं, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

22 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ या अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाई जा सकती है। इस दिन राहुकाल दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक और यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अशुभ माने जाने वाले समय में नए मांगलिक कार्य शुरू करने से परहेज किया जाता है।

इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा। चंद्रमा दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन रात 1 बजकर 22 मिनट पर अस्त होगा।

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है।


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