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मुजफ्फरपुर के बगलामुखी मंदिर में गर्भगृह के नीचे स्थापित है सहस्रदल महायंत्र: बिहार

मुजफ्फरपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर में 250 साल से ज्यादा पुराना मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ इस नवरात्र के दौरान आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मुजफ्फरपुर के बगलामुखी मंदिर में गर्भगृह के नीचे स्थापित है सहस्रदल महायंत्र: बिहार
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मुजफ्फरपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर में 250 साल से ज्यादा पुराना मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ इस नवरात्र के दौरान आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

शहर के मिठनपुरा स्थित कच्ची सराय रोड पर मौजूद इस मंदिर में दिनभर मां की पूजा-अर्चना होती है, जबकि रात के सन्नाटे में विशेष निशा पूजा और तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर की विशिष्ट परंपराओं के कारण बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों से साधक और श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।

नवरात्र शुरू होते ही मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। यहां वैदिक और तांत्रिक, दोनों पद्धतियों से पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। मंदिर के महंत देवराज महाराज ने बताया कि इस सिद्धपीठ का इतिहास लगभग ढाई सौ साल पुराना है।

मंदिर से जुड़ी परंपरा के अनुसार, महंत अजीत कुमार प्रसाद के पूर्वज रूपल प्रसाद ने कलकत्ता के कारीगरों से मां बगलामुखी की प्रतिमा का निर्माण कराया था। वर्ष 1993-94 में मंदिर को वर्तमान स्वरूप देने की दिशा में काम शुरू हुआ। गर्भगृह में अष्टधातु से निर्मित मां की दस भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। महंत ने बताया कि नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा, महायज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

मां बगलामुखी के पीतांबरी स्वरूप के कारण यहां पीले वस्त्र और पीली पूजन सामग्री का विशेष महत्व है। श्रद्धालु हल्दी, दही और दूर्वा अर्पित कर मां की आराधना करते हैं। मंदिर की मान्यता के अनुसार, लगातार 21 दिनों तक विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। इस सिद्धपीठ की सबसे खास विशेषताओं में गर्भगृह के ठीक नीचे स्थापित सहस्रदल महायंत्र शामिल है।

मंदिर की परंपरा के अनुसार, इस महायंत्र पर महाविद्याओं की साधना की जाती है। नवरात्र के दौरान रात करीब 11 बजे से दो बजे तक होने वाली निशा पूजा में साधक शामिल होते हैं। इस दौरान महायंत्र का दुग्धाभिषेक और निर्धारित विधि-विधान के अनुसार विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर की यही विशिष्ट साधना परंपरा इसे अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।

मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि मां बगलामुखी के प्रति उनकी गहरी आस्था है। उन्होंने कहा, “नवरात्र में मां के दर्शन और पूजा करने से मन को शांति मिलती है। यहां की पूजा-पद्धति और धार्मिक वातावरण विशेष अनुभूति कराते हैं। हम मां से परिवार की सुख-समृद्धि और सबके कल्याण की प्रार्थना करते हैं।”

मंदिर परिसर में मां त्रिपुर सुंदरी, मां तारा और काल भैरव के भी मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते हैं। महानवमी पर विशेष हवन आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की उम्मीद है। नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के बीच यह सिद्धपीठ मुजफ्फरपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।


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