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भारत में मानसून के आने से ऊर्जा मांग घटकर 241 हो गयी

नई दिल्ली, मानसून के आने से भारत की उच्चतम ऊर्जा मांग में कमी देखने को मिली है और यह 16 जून को कम होकर 241 गीगावाट हो गई है, जो कि 21 मई को दर्ज किए गए ऑल-टाइम हाई 270.8 गीगावाट और इस महीने 9 जून को दर्ज की गई मांग 259 गीगावाट से कम है।

भारत में मानसून के आने से ऊर्जा मांग घटकर 241 हो गयी
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नई दिल्ली, मानसून के आने से भारत की उच्चतम ऊर्जा मांग में कमी देखने को मिली है और यह 16 जून को कम होकर 241 गीगावाट हो गई है, जो कि 21 मई को दर्ज किए गए ऑल-टाइम हाई 270.8 गीगावाट और इस महीने 9 जून को दर्ज की गई मांग 259 गीगावाट से कम है। यह जानकारी ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई।

ऊर्जा की मांग में कमी आने की वजह देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का आगमन है, जिससे एसी के साथ-साथ अन्य कूलिंग उकरणों का उपयोग कम हो गया है।

डेटा के मुताबिक, भारत के ऊर्जा मिश्रण में कोयल से पैदा होने वाली बिजली की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत, जबकि सोलर और हाइड्रो की हिस्सेदारी क्रमश: 19 प्रतिशत और 7 प्रतिशत थी।

मांग में कमी आने के कारण बाजारों में ऊर्जा की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।

इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, जून के मध्य में औसत स्पॉट पावर की कीमत 3.6 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा थी, जो एक साल पहले के मुकाबले 18 प्रतिशत कम है। 16 जून को रियल-टाइम मार्केट में कीमतें 4.5 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा थीं, जबकि 21 मई को ये 6.5 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा थीं, जब बिजली की मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी।

भारत में बिजली की मांग आमतौर पर मई और जून के महीनों में सबसे अधिक होती है, क्योंकि गर्मी के कारण घरों और बिजनेस में कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।

आमतौर पर मानसून के दौरान तापमान कम हो जाता है, जिससे ऊर्जा की मांग कम हो जाती है।

इसके अतिरिक्त, हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल बढ़ने के कारण पूरी दुनिया में बिजली की खपत बढ़ रही है।

बिजनेस और टेक्नोलॉजी इनसाइट्स कंपनी गार्टनर, इंक. की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया में बिजली की मांग 2026 में 26.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जिससे खपत 2025 के 447 टेरावाट घंटे से बढ़कर 565 टेरावाट घंटे होने की उम्मीद है।

खपत में अनुमानित बढ़ोतरी की वजह कंप्यूट-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्कलोड है, जिनकी वजह से बिजली की मांग नए उच्चतम स्तर तक पहुंच जाएगी।


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