इसरो ने जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को ऑर्बिट में पहुंचा
नई दिल्ली, इसरो ने जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचाकर अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक्स पर पोस्ट किया, "मिशन सफल! जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा में स्थापित करके अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।"

नई दिल्ली, इसरो ने जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचाकर अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक्स पर पोस्ट किया, "मिशन सफल! जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा में स्थापित करके अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।"
सफल लॉन्च के बाद इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ 17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और जीएसएलवी का 19वां मिशन है। जैसा कि आप जानते हैं, जीएसएलवी का पहला प्रक्षेपण जीएसएलवी-डी1 था, जिसमें 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था। तब से हमने इसके स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज़ करके और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार करके इस व्हीकल की परफॉर्मेंस को धीरे-धीरे बेहतर बनाया है। आज, हमने इसी लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करके 2,367 किलोग्राम वज़न वाले सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया है।"
डॉ. वी. नारायणन ने कहा, "इसे पूरी तरह से भारत सरकार स्थापित करेगी। हम लॉन्च पैड बनाएंगे, सब कुछ भारत सरकार ही बनाएगी। लेकिन अब इसे ऑपरेट करना है। इसे ऑपरेट करने के दो तरीके हैं। आप बहुत सारे स्थायी कर्मचारी रख सकते हैं और उन्हें इसे ऑपरेट करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि हम इसे प्राइवेट प्लेयर्स को सौंप दें और वे इसे ऑपरेट करें।"
इसरो प्रमुख ने कहा, "अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लगातार भारत की निगरानी और स्कैनिंग करेगा। इसलिए, इसका इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जा सकता है। 'जासूसी' शब्द का इस्तेमाल करना बहुत नकारात्मक है। यह सैटेलाइट काम का होगा और इससे मिलने वाला डेटा हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा।"
डॉ. वी. नारायणन ने कहा, "गगनयान एक टेक्नोलॉजी-प्रधान मिशन है। इसलिए, हमें व्हीकल की 'ह्यूमन-रेटिंग' करनी होगी, और उसके बाद क्रू एस्केप सिस्टम और एनवायरनमेंटल कंट्रोल सिस्टम को डेवलप करना होगा। अब तक लगभग 8,000 टेस्ट पूरे हो चुके हैं। दूसरे सैटेलाइट मिशन के उलट, इसमें इंसान शामिल हैं, इसलिए इंसानों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। हमने क्रू वाले मिशन से पहले तीन बिना क्रू वाले मिशन की योजना बनाई है। पहला बिना क्रू वाला मिशन इस साल लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। नतीजों की समीक्षा करने के बाद, हम दो और बिना क्रू वाले मिशन करेंगे, और उसके बाद क्रू वाला मिशन होगा।"
इसरो के अनुसार, जीएसएलवी-एफ 17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) का 19वीं मिशन है और जीएसएलवी-एफ के पेलोड फेयरिंग का कॉन्फ़िगरेशन 4 मीटर व्यास वाले ओजाइव (कम्पोजिट) ढांचे का उपयोग किया गया है। जीएसएलवी-एफ 17 व्हीकल ने ईओएस-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया है। इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर, एसएचएआर के दूसरे लॉन्च पैड (एसएलपी) से लॉन्च करने की योजना थी। ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट है। यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है।
परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पोस्ट में कहा, "अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिए एक और बड़ी उपलब्धि! जीएसएलवी-एफ 17/ ईओएस-05 के सफल लॉन्च के लिए इसरो की टीम को बधाई। ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं और एक ग्लोबल स्पेस पावर के तौर पर हमारी स्थिति मजबूत हो रही है।"


