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25 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के कर्मचारी एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए तैयार

नई दिल्ली, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियों का मानना है कि कर्मचारियों की तैयारी इस रफ्तार का साथ नहीं दे पा रही है।

25 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के कर्मचारी एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए तैयार
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नई दिल्ली, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियों का मानना है कि कर्मचारियों की तैयारी इस रफ्तार का साथ नहीं दे पा रही है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल 25 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का मानना है कि उनकी वर्कफोर्स एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है। यह आंकड़ा 2025 के मुकाबले 12 प्रतिशत अंक कम है।

काइंड्रिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 56 प्रतिशत कंपनियों ने एआई को अपने प्रमुख बिजनेस प्रोसेस में व्यापक रूप से लागू कर दिया है। पिछले साल 2025 में 36 प्रतिशत कंपनियों ने कहा था कि एआई उनके संगठन में पूरी तरह एकीकृत हो चुका है। इससे साफ है कि एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों की तैयारी उस गति से नहीं हो रही।

रिपोर्ट में बताया गया कि 81 प्रतिशत भारतीय बिजनेस लीडर्स को चिंता है कि एआई का विकास कर्मचारियों की क्षमताओं, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और ऑपरेटिंग मॉडल से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इसके अलावा, 84 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में स्वायत्त एआई एजेंट महत्वपूर्ण कारोबारी फैसले लेने लगेंगे। हालांकि, केवल 28 प्रतिशत कंपनियां ही ऐसे एआई सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करती हैं, जो बिना किसी मानवीय निगरानी के काम करें।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई अपनाने की दिशा में भारतीय कंपनियां कई अहम कदम भी उठा रही हैं। करीब 69 प्रतिशत कंपनियों ने एआई को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की भूमिकाओं में बदलाव किया है, जबकि 33 प्रतिशत संगठनों ने कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए अलग बजट और औपचारिक योजनाएं शुरू की हैं।

इसके बावजूद, रिपोर्ट बताती है कि कंपनियों में संगठनात्मक बदलाव की गति, एआई से जुड़े गवर्नेंस, भरोसे और निगरानी व्यवस्था के विकास से कहीं अधिक तेज है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई की सफलता केवल नई रणनीतियों, तकनीकों या उपयोग के मामलों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि कंपनियां काम करने के तरीके को किस तरह बदलती हैं और कर्मचारियों को उस बदलाव के लिए कैसे तैयार करती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एआई पर भरोसा मजबूत करने के लिए कंपनियों को अपने ऑपरेटिंग मॉडल और गवर्नेंस सिस्टम में भी ठोस बदलाव करने होंगे।

काइंड्रिल इंडिया के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट लिंगराजू सावकर ने कहा कि भारत लगातार नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहा है और कंपनियां तेजी से एआई को अपने कारोबार का हिस्सा बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि एआई से वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब कंपनियां केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित न रहें, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव करें, कर्मचारियों की नई भूमिकाएं तय करें, उनकी क्षमताओं का विकास करें और ऐसा गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करें, जिससे एआई का जिम्मेदार और भरोसेमंद उपयोग सुनिश्चित हो सके।

यह रिपोर्ट आठ देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के 1,100 वरिष्ठ बिजनेस और टेक्नोलॉजी लीडर्स के सर्वेक्षण पर आधारित है।


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