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एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, भारत और लक्जमबर्ग ने अंतरिक्ष, उभरती प्रौद्योगिकियों और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा की है। सोमवार को लक्जमबर्ग के अर्थव्यवस्था, लघु एवं मध्यम उद्यम, ऊर्जा और पर्यटन मंत्री लेक्स डेल्स ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने का प्रस्ताव रखा।

एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
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नई दिल्ली, भारत और लक्जमबर्ग ने अंतरिक्ष, उभरती प्रौद्योगिकियों और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा की है। सोमवार को लक्जमबर्ग के अर्थव्यवस्था, लघु एवं मध्यम उद्यम, ऊर्जा और पर्यटन मंत्री लेक्स डेल्स ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने का प्रस्ताव रखा।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक ऐसे सहयोगी तंत्र पर विचार किया जो अंतरिक्ष क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री विज्ञान और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ा सके। यह तंत्र जनवरी 2027 में प्रस्तावित लक्जमबर्ग के भारत दौरे से पहले दोनों देशों की ओर से ठोस सुझाव और सहयोगी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में भी मदद करेगा।

बैठक के दौरान भारत-लक्जमबर्ग अंतरिक्ष सहयोग की मौजूदा स्थिति, संस्थागत और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं तथा प्रस्तावित राजकीय यात्रा की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। लक्जमबर्ग के प्रतिनिधिमंडल में मंत्री के कार्यालय, आर्थिक नीति, उद्योग, नई प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान विभाग और लक्जमबर्ग स्पेस एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक आयाम भी हासिल कर चुका है, जिसमें संचार उपग्रह ट्रांसपोंडर लीजिंग और भारतीय पीएसएलवी रॉकेट के माध्यम से लक्जमबर्ग के दो उपग्रहों का वाणिज्यिक प्रक्षेपण शामिल है। उन्होंने बताया कि इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) और लक्जमबर्ग स्पेस एजेंसी भी दोनों देशों के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय और व्यावसायिक सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में सहभागिता की संभावनाएं बढ़ी हैं।

जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ. सिंह ने लक्जमबर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और लक्जमबर्ग सेंटर फॉर सिस्टम्स बायोमेडिसिन जैसे संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से जुड़े अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त कार्य की संभावना पर जोर दिया।

वहीं, मंत्री लेक्स डेल्स ने कहा कि लक्जमबर्ग भारत के साथ अंतरिक्ष, उपग्रह संचार, एआई, साइबर सुरक्षा और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को इच्छुक है। उन्होंने भारत में व्यवसाय विस्तार के लिए लक्जमबर्ग की कंपनियों के सामने मौजूद अवसरों का भी उल्लेख किया।

डेल्स ने यह भी कहा कि दोनों देशों के सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच अधिक संपर्क और सहयोग आवश्यक है, ताकि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाया जा सके।


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