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कंटेनर निर्माण सहायता योजना से आयात पर घटेगी निर्भरता

नई दिल्ली, केंद्र सरकार की प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (सीएमएएस) देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने, आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता कम करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

कंटेनर निर्माण सहायता योजना से आयात पर घटेगी निर्भरता
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नई दिल्ली, केंद्र सरकार की प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (सीएमएएस) देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने, आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता कम करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। सरकार के अनुसार, इस योजना से 53,000 से अधिक रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है, साथ ही भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलेगी।

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत विभिन्न आकार के 51 कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद के लिए लगभग 99,149 करोड़ रुपए के निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे भारत में समुद्री परिवहन और निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलेगी।

बयान में कहा गया है कि सीएमएएस के जरिए करीब 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं। इन अवसरों का लाभ कंटेनर निर्माण, सहायक उद्योगों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों को मिलेगा।

10,000 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली यह योजना कंटेनर निर्माण क्षेत्र में निवेश, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी। सरकार का मानना है कि इससे कंटेनर इकोसिस्टम से जुड़े कई सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिनमें कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पादों का निर्माण करने वाले उद्योग शामिल हैं।

सरकार ने कहा कि सीएमएएस भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सप्लाई चेन अधिक मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बल मिलेगा।

यह योजना 'मेक इन इंडिया', 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास जैसी सरकार की प्रमुख पहलों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

भारत की बढ़ती व्यापारिक और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं ने घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के अनुसार, वैश्विक माल व्यापार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से परिवहन किया जाता है। ऐसे में कंटेनरों की उपलब्धता वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण आधार है।

सरकार ने बताया कि वर्तमान में भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर वर्ष करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। सीएमएएस का उद्देश्य इसी आयात निर्भरता को कम करना और देश में मजबूत विनिर्माण आधार तैयार करना है।

यूएनसीटीएडी ने भी अपनी रिपोर्टों में कहा है कि हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री माल ढुलाई दरों में अस्थिरता बढ़ी है और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बना है। इस कारण कई देश अब कंटेनरों जैसे महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक उपकरणों के घरेलू निर्माण पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

सरकार का मानना है कि शिपिंग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में चल रहे व्यापक सुधारों के साथ यह नई योजना भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करेगी और लंबे समय में देश की वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगी।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार हाल ही में 70,000 करोड़ रुपए के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की भी घोषणा कर चुकी है, जिसका उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाना और समुद्री विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है।


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