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भारत के डेटा सेंटर उद्योग में 200 अरब डॉलर का निवेश

नई दिल्ली, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि सरकार को उम्मीद है कि डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई इकोसिस्टम से बड़े पैमाने पर पैदा हुए अवसरों को दर्शाता है।

भारत के डेटा सेंटर उद्योग में 200 अरब डॉलर का निवेश
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नई दिल्ली, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि सरकार को उम्मीद है कि डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई इकोसिस्टम से बड़े पैमाने पर पैदा हुए अवसरों को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री ने यहां “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) फॉर स्केलिंग इंडिया डेटा सेंटर इकोसिस्टम” विषय पर आयोजित सीईओ राउंडटेबल के दौरान कहा कि डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारत दुनिया का सबसे बेहतर स्थान है।

गोयल ने वैश्विक अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच भारत की विकास संभावनाओं पर भरोसा जताया और कहा कि पहली तिमाही में देश विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है।

गोयल ने डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योगों की क्षमता, एआई के क्षेत्र में भारत की बढ़ती मौजूदगी और वैश्विक गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए देश के विस्तारित विनिर्माण आधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देंगे और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि पक्षकारों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही और सरकार के विभिन्न विभागों तथा राज्यों के बीच चर्चा से पहले ही कई मुद्दों का समाधान करने में मदद मिली है।

यह राउंडटेबल भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र के तेज और टिकाऊ विस्तार के लिए सक्षम इकोसिस्टम को और मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित पहले सीईओ राउंडटेबल की अगली कड़ी के रूप में आयोजित किया गया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, चर्चा का केंद्र ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे की तेज तैनाती रही। इसमें विशेष रूप से बिजली, जमीन, नियामकीय और राजकोषीय मुद्दों पर चर्चा की गई।

पक्षकारों ने पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की। इसमें क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन और सबस्टेशन की योजना, पहले दिन से स्वीकृत लोड, दोहरे बिजली फीडर और राज्यों की सीमाओं के पार नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद को सुगम बनाने जैसे उपाय शामिल हैं।

डेटा सेंटर के लिए तैयार भूमि बैंक और पहले से चिन्हित बिजली-तैयार भूखंडों की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर की कुल क्षमता खपत में हाइपरस्केलर्स की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही, जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के गंतव्य के रूप में भारत के उभरने को रेखांकित करता है।


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