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कोटा में राहुल गांधी का शिक्षा व्यवस्था पर तीखा वार

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज महारैली' में देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दों पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया

कोटा में राहुल गांधी का शिक्षा व्यवस्था पर तीखा वार
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नीट-जेईई पर भारी खर्च, रोजगार की गारंटी शून्य: राहुल

  • 100 इंजीनियरों में 80 बेरोजगार, शिक्षा तंत्र पर सवाल
  • छात्रों की आत्महत्या व्यवस्था की विफलता: राहुल गांधी
  • सरकारी शिक्षा कमजोर, निजी कोचिंग को बढ़ावा: राहुल का आरोप

कोटा। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान के कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज महारैली' में देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दों पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था छात्रों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन पर आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बन गई है। करीब एक घंटे तक चले संवाद के दौरान श्री गांधी ने कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं, चुनौतियों और आशंकाओं पर चर्चा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रोजगारोन्मुख नहीं है और युवाओं को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने में विफल रही है।

श्री गांधी ने दावा किया कि देश में केवल 1.2 प्रतिशत युवाओं को ही वेतनभोगी नौकरी मिल पाती है। उन्होंने कहा कि 22 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल होते हैं और उनके परिवार इस परीक्षा की तैयारी पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो उनके अनुसार केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वार्षिक बजट के बराबर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीट, जेई, यूपीएससी, एसएससी और आरआरबी जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर छात्रों और उनके परिवारों का कुल खर्च करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है।

श्री गांधी ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजी शिक्षा और कोचिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि महंगे निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भारी खर्च के बावजूद युवाओं को रोजगार की कोई गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने दावा किया कि देश में 100 इंजीनियरों में से 80 बेरोजगार हैं।

अपने संबोधन के दौरान श्री गांधी ने नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किसी छात्र की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने कहा, "भारत का शिक्षा तंत्र सलेक्शन नहीं, बल्कि रिजेक्शन की प्रणाली बन गया है।"

उन्होंने छात्रों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने और बदलाव की प्रक्रिया में भागीदारी की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि देश का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर है और ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें छात्र कम आर्थिक बोझ के साथ अपने सपनों को साकार कर सकें। कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्रों ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए, हालांकि उन्होंने नारेबाजी से बचते हुए संवाद पर जोर देने की अपील की।


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