Top
Begin typing your search above and press return to search.

छात्र आंदोलन पर सियासी घमासान: राहुल गांधी-खरगे ने जेन-जी पर FIR का किया विरोध, केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि छात्र आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ पहले बल प्रयोग किया गया और अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराए जा रहे हैं।

छात्र आंदोलन पर सियासी घमासान: राहुल गांधी-खरगे ने जेन-जी पर FIR का किया विरोध, केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
X

नई दिल्ली : देश के विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित कई विपक्षी दलों ने भी सरकार की आलोचना की और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार की मांग की।

राहुल गांधी बोले- 'युवाओं को डराने की कोशिश हो रही'

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि छात्र आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ पहले बल प्रयोग किया गया और अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वे "भारत का अतीत" हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

खरगे ने उठाए कई सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। खरगे ने दावा किया कि कई युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए जा रहे हैं और प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि केवल छवि बचाने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन देश का युवा अब वास्तविक स्थिति को समझ चुका है। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आलोचना को स्वीकार करने के बजाय विरोध को दबाने की नीति अपना रही है।

विपक्षी दलों ने भी जताई आपत्ति

राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की असहमति को सम्मान देना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, लोगों को डराकर या कानूनी कार्रवाई के जरिए विरोध को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है। मनोज झा ने कहा कि सरकार को संवैधानिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर आपत्ति जताई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि युवाओं की चिंताओं को सुनने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है।

एफआईआर को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबरों के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए कानूनी कार्रवाई का सहारा ले रही है, जबकि सरकार की ओर से इस विषय पर अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दे अक्सर व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं और विभिन्न दल इन्हें अपने-अपने दृष्टिकोण से उठाते हैं।

लोकतंत्र में असहमति पर फिर छिड़ी बहस

छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई के बाद लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से असंतोष बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और प्रशासन की होती है, जो उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई करते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it