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राज्यसभा में राहुल गांधी के मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं मिली बोलने की अनुमति, विपक्ष ने किया वॉकआउट

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि वह संविधान से जुड़े गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं और संसद दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनी है। इसलिए एक सदन में हुई घटनाओं पर दूसरे सदन में चिंता जताना अनुचित नहीं है।

राज्यसभा में राहुल गांधी के मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं मिली बोलने की अनुमति, विपक्ष ने किया वॉकआउट
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नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को राज्यसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कथित तौर पर अपना भाषण पूरा नहीं करने दिए जाने के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने उच्च सदन में विरोध दर्ज कराया। सभापति द्वारा चर्चा की अनुमति न दिए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब लोकसभा में भी पिछले कुछ दिनों से लगातार व्यवधान जारी है और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच तीखी टकराव की स्थिति बनी हुई है।

प्रश्नकाल के दौरान उठा मुद्दा

सोमवार को दोपहर 12 बजे जैसे ही राज्यसभा में प्रश्नकाल शुरू हुआ, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि वह संविधान से जुड़े गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं और संसद दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनी है। इसलिए एक सदन में हुई घटनाओं पर दूसरे सदन में चिंता जताना अनुचित नहीं है। हालांकि, सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में लोकसभा से संबंधित घटनाओं पर चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि यह विषय दूसरे सदन का है और यहां उस पर विचार नहीं होगा।

रिकॉर्ड में नहीं जाएगी टिप्पणी

जब खड़गे ने अपनी बात जारी रखी, तो सभापति ने कहा कि उनके द्वारा कही गई बातें रिकॉर्ड में नहीं ली जाएंगी। इसके बावजूद विपक्षी सदस्य अपनी मांग पर अड़े रहे और चर्चा की अनुमति देने की अपील करते रहे। सभापति ने प्रश्नकाल को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सांसदों ने विरोध जारी रखा। स्थिति तब और गरमा गई जब विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर महिला सांसदों के अपमान का आरोप लगाया।

विपक्ष का वॉकआउट

तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर विपक्षी गठबंधन “इंडिया” (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के घटक दलों के सदस्य अपनी सीटों से खड़े रहे और विरोध दर्ज कराते रहे। कुछ देर तक नारेबाजी के बाद विपक्षी सांसदों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया। विपक्ष के बाहर जाने के बाद प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी रही।

लोकसभा में जारी है गतिरोध

लोकसभा में तीन फरवरी से लगातार व्यवधान देखने को मिल रहा है। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सदन के अध्यक्ष ओम बिरला ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की “अप्रकाशित आत्मकथा” के अंशों पर आधारित एक लेख का हवाला देने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि लेख में वर्ष 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष का उल्लेख था। अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए इस संदर्भ को सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद से विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव तेज हो गया। लोकसभा में इस दौरान विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित भी किया गया है।

प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर विवाद

पांच फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा था कि उनके पास “ठोस जानकारी” है कि कुछ कांग्रेस सदस्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सीट की ओर बढ़ सकते हैं और “कोई अप्रत्याशित कदम” उठा सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में उपस्थित न होने का अनुरोध किया था। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और हवा दी। विपक्ष ने इसे आधारहीन आरोप बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को सही ठहराने का प्रयास है।

महिला सांसदों का पत्र

सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस की महिला सांसदों ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के दबाव में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को उचित ठहराने के लिए विपक्ष को निशाना बनाया गया। महिला सांसदों ने इस पूरे प्रकरण को उनकी गरिमा के खिलाफ बताया और अध्यक्ष से निष्पक्षता बरतने की मांग की।

अध्यक्ष को हटाने की तैयारी

कई विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को बोलने से रोककर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। हालांकि, किसी भी ऐसे प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना आवश्यक होगा, जो फिलहाल एक राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

संवैधानिक और प्रक्रियात्मक सवाल

यह पूरा विवाद संसद की कार्यप्रणाली, अध्यक्ष के अधिकारों और विपक्ष की भूमिका को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। संसदीय नियमों के अनुसार, सदन के संचालन का अंतिम अधिकार अध्यक्ष के पास होता है। वहीं, विपक्ष का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का अवसर मिलना चाहिए, विशेषकर तब जब चर्चा राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ी हो। राज्यसभा में भी यही संवैधानिक प्रश्न उठा कि क्या एक सदन में हुई घटना पर दूसरे सदन में चर्चा की जा सकती है। सभापति ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिससे टकराव और गहरा गया।

विधेयकों और चर्चाओं पर असर

बजट सत्र के दौरान लगातार हो रहे व्यवधानों ने संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया है। यदि गतिरोध जारी रहता है, तो महत्वपूर्ण विधेयकों और चर्चाओं पर असर पड़ सकता है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर अपना विरोध जारी रखेगा। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन की गरिमा और नियमों का पालन सर्वोपरि है। अब यह देखना होगा कि दोनों पक्ष आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालते हैं या संसद में टकराव और तेज होता है। फिलहाल, राहुल गांधी को भाषण से रोके जाने का मुद्दा संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।


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