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हन्नान मोल्लाह का टीएमसी पर हमला, बोले- कपूर की तरह खत्म हो रही है पार्टी

सीपीआई(एम) नेता और पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पार्टी अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। यह पार्टी कपूर की तरह उड़ रही है

हन्नान मोल्लाह का टीएमसी पर हमला, बोले- कपूर की तरह खत्म हो रही है पार्टी
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नई दिल्ली। सीपीआई(एम) नेता और पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पार्टी अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। यह पार्टी कपूर की तरह उड़ रही है। जैसे कपूर हवा में घुल जाता है, वैसे ही यह भी हो रही है और यह स्वाभाविक था।

उनके अनुसार, कोई भी राजनीतिक संगठन तभी टिकता है, जब उसमें ईमानदार, शिक्षित और वैचारिक रूप से मजबूत लोग हों, लेकिन अगर संगठन में अपराधी, असामाजिक तत्व और लूटपाट करने वाले लोग शामिल हो जाएं तो वह लंबे समय तक नहीं चल सकता।

हन्नान मोल्लाह ने आरोप लगाया कि टीएमसी में ऐसे लोग अपने निजी हितों के लिए आते हैं और उन्होंने पिछले 15 वर्षों में राज्य में जमकर लाभ उठाया है। उन्होंने कहा कि अब जब उन्हें लगता है कि आगे अवसर कम हो रहे हैं, तो वे दूसरी जगहों की तलाश में हैं ताकि फिर से उसी तरह का फायदा उठा सकें। उनके मुताबिक इस वजह से आम जनता को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर कुछ दलों के सांसदों को अपने पक्ष में करके बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उनके पास अभी पूर्ण बहुमत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिए आगे बढ़ाई जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के आरक्षण का कानून पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन उसे अब तक ठीक से लागू नहीं किया गया है। ऐसे में परिसीमन के नाम पर नए राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार इसका असली उद्देश्य देश के वोटिंग पैटर्न और राजनीतिक नक्शे को बदलना हो सकता है।

मोल्लाह ने यह भी तर्क दिया कि जहां बेहतर प्रशासन और शांतिपूर्ण जीवन है, वहां आबादी कम होने के कारण सीटें घट सकती हैं, जबकि जहां अपराध, सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक समस्याएं अधिक हैं, वहां सीटें बढ़ सकती हैं। इससे संतुलन बिगड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों का राजनीतिक वर्चस्व बढ़ सकता है।


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