Top
Begin typing your search above and press return to search.

'ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो', सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी बोले- नहीं हटे तो करेंगे मजबूर

मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव अब सड़क पर आने की तैयारी में है

ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो, सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी बोले- नहीं हटे तो करेंगे मजबूर
X

नई दिल्ली। मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव अब सड़क पर आने की तैयारी में है। सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने 30 सितंबर की इंडिया ब्लॉक बैठक का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से निर्वाचन सदन तक सांसदों के संयुक्त मार्च का ऐलान किया है।

सीपीआईएम के महासचिव एमए बेबी ने कहा, "30 सितंबर को इंडिया ब्लॉक की बैठक हुई थी। महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि इंडिया ब्लॉक से संबंधित सभी सदस्य, और यदि अन्य विपक्षी दल भी इच्छुक हैं तो उनके सांसद, हम सभी को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए निर्वाचन सदन के सामने संसद सदस्यों के रूप में एक साथ मार्च करना चाहिए, जो 'वोट चोरी' की गतिविधियों में रंगे हाथों पाए गए हैं।"

उन्होंने कहा कि 130 मिलियन लोगों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर यह अस्वीकार्य है। अगर वह इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, तो हम संघर्ष करके उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह ज्ञानेश कुमार के मनमाने तरीके को दर्शाता है। किसी समय उन्होंने यह प्रभाव बनाने की कोशिश की कि सब कुछ कानून के अनुसार किया जा रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट में था और सुनवाई के दौरान कुछ बातचीत हुई थी, उन्होंने इसे ऐसे समझा जैसे सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से किया गया हो। यह अच्छा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं इसे स्पष्ट किया है और यह दर्शाता है कि ज्ञानेश कुमार अवैध और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से व्यवहार कर रहे हैं।

एक अन्य सवाल को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत सही अवलोकन है, जो राहुल गांधी ने किया है और इंडिया ब्लॉक से संबंधित सभी दल, हम सभी उस स्थिति में खड़े हैं।

सीपीआईएम के महासचिव ने कहा कि यह भाजपा प्रवक्ता का एक बेतुका दावा है। आप देखिए, अब भाजपा सरकार की विभिन्न अवैध पहलों पर हमारे समाज में चर्चा हो रही है। चुनाव आयुक्तों के चयन के संबंध में यह अत्यधिक पक्षपाती कानून है। वहां मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को एक असाधारण सुरक्षा दी गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यकाल के दौरान उनको सिविल या आपराधिक अभियोजन के अधीन नहीं किया जाएगा।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it