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सीबीएसई ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर उठे विवादों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

सीबीएसई ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज
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नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर उठे विवादों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

बोर्ड ने कहा है कि कोएम्प्ट एडुटेक को दिया गया कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह नियमों के तहत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर दिया गया है। सीबीएसई ने इन आरोपों को भ्रामक, गलत और तथ्यों से परे बताया है।

सीबीएसई मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि बोर्ड ने कॉन्ट्रैक्ट देने के दौरान सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) के सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया। बोर्ड के मुताबिक, 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन हेतु प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर जारी किया गया था और योग्य बोलीदाता को ही कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।

दरअसल, यह विवाद उस समय बढ़ा, जब लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई परीक्षा परिणामों में 'हेरफेर' का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि मूल्यांकन प्रणाली में अनियमितताओं के कारण करीब 1.85 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी जांच की मांग की।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सीबीएसई रिजल्ट में हुई गड़बड़ी से देशभर के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता सदमे में हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हमेशा की तरह इस मुद्दे पर भी कोई जवाबदेही नहीं दिखाई दे रही।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस कंपनी कोएम्प्ट को यह जिम्मेदारी दी गई, वह पहले ग्लोबारेना नाम से काम करती थी और 2019 में तेलंगाना में भी विवादों में रह चुकी है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर इस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट किसके आदेश पर दिया गया और क्या प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच नहीं की गई थी और कंपनी प्रबंधन का सरकार से क्या संबंध है।


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