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मेघालय: यूडीपी के आठ पूर्व विधायकों ने भाजपा में शामिल होने के फैसले को दोहराया

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने वाले मेघालय के आठ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा से मुलाकात की और भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की।

मेघालय: यूडीपी के आठ पूर्व विधायकों ने भाजपा में शामिल होने के फैसले को दोहराया
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शिलांग। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने वाले मेघालय के आठ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा से मुलाकात की और भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की।

लाखमेन रिम्बुई की अगुवाई में विधायकों ने स्पीकर से मुलाकात की और यूडीपी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले को फिर से दोहराया।

वे पहले भी इस मामले को लेकर स्पीकर से मिलने गए थे, लेकिन बताया जाता है कि उस समय वे शहर से बाहर थे।

बैठक के बाद रिम्बुई ने कहा कि सभी आठ विधायक अपने फैसले को पक्का करने के लिए खुद वहां पहुंचे थे।

रिम्बुई ने कहा, "आज की बैठक का मकसद यह है कि, जैसा कि आप जानते हैं, जब हम उस दिन आए थे, तो हमारे स्पीकर शहर से बाहर थे। इसलिए आज हम सभी आठ लोग खुद यहां आए हैं और उस दिन जो बात कही थी, उसे फिर से दोहरा रहे हैं।"

स्पीकर के साथ बैठक के दौरान भाजपा विधायक सनबोर शुल्लाई भी उन आठ विधायकों के साथ थे। इन आठ विधायकों ने 23 सितंबर को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामा था। यह मेघालय में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है, जहाँ राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय पार्टियों की पारंपरिक रूप से अहम भूमिका रही है।

मेघालय की प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों में से एक यूडीपी से भाजपा में उनके जाने का असर 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने की उम्मीद है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मेघालय में राजनीतिक पार्टियां अगले चुनावी मुकाबले की तैयारी कर रही हैं। पार्टी बदलने से संगठनात्मक रणनीतियों और पूरे राज्य में समर्थन जुटाने की कोशिशों पर असर पड़ने की संभावना है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही भाजपा को इन आठ विधायकों के शामिल होने से फायदा हो सकता है, क्योंकि वह मेघालय में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

वहीं, यूडीपी के सामने एक राष्ट्रीय पार्टी में अपने आठ विधायकों के चले जाने के बाद स्थिति को संभालने की चुनौती है। विधायकों के साथ स्पीकर की बैठक, पार्टी बदलने के उनके फैसले से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया का एक और कदम है।

इस कदम के राजनीतिक नतीजों पर चर्चा होती रहेगी, क्योंकि मेघालय की पार्टियां 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए खुद को तैयार करना शुरू कर रही हैं।


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