अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने कॉफी की खेती बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को राज्य में कॉफी की खेती का विस्तार करने, उत्पादकता और बीन की गुणवत्ता में सुधार करने और वैल्यू चेन को मजबूत करके कॉफी उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को राज्य में कॉफी की खेती का विस्तार करने, उत्पादकता और बीन की गुणवत्ता में सुधार करने और वैल्यू चेन को मजबूत करके कॉफी उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विस्तार की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में अभी सिर्फ 600 हेक्टेयर जमीन पर ही कॉफी की खेती होती है।
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया और राज्य के कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित ‘हिल्स टू कप’ कॉफी वर्कशॉप के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉफी राज्य के लिए कोई नई चीज नहीं है। इसकी खेती लगभग पांच दशक पहले शुरू हो गई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इतने सालों में कॉफी की संभावनाओं के बारे में लोगों में काफी जागरूकता नहीं आई और न ही इसे ठीक से बढ़ावा दिया गया।
खांडू ने इस वर्कशॉप को अरुणाचल प्रदेश में कॉफी की खेती की नई शुरुआत बताया, क्योंकि यह किसानों, युवा उद्यमियों, तकनीकी विशेषज्ञों और दूसरे संबंधित लोगों को एक मंच पर लाती है। उन्होंने कहा, "एक तरह से, यह अरुणाचल प्रदेश में कॉफी के इतिहास की दिशा में राज्य के आगे बढ़ने का पहला अध्याय है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कॉफी उगाने वालों और उद्यमियों की मदद के लिए सही नीतियां बनाएगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने कृषि अधिकारियों, एक रिटायर्ड पीसीसीएफ और अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वाले तीन सदस्यों के एक दल का गठन किया है, जो आंध्र प्रदेश और दूसरे राज्यों का दौरा करके कॉफी की खेती, उसके तरीकों और विकास के मॉडलों का अध्ययन करेगा।
खांडू ने कहा कि यह वर्कशॉप किसानों के सामने आने वाली तकनीकी कमियों और चुनौतियों की पहचान करने में मदद करेगी, जिसके बाद कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के तकनीकी विशेषज्ञ राज्य सरकार के लिए सुझाव तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने हिस्सा लेने वालों को भरोसा दिलाया, "वे जो भी सुझाव देंगे, राज्य सरकार आने वाले दिनों में आपको पूरा सहयोग देगी।"
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले पांच-छह सालों में खेती और बागवानी के तहत कई उपाय और योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन कॉफी के लिए अब तक कोई खास पॉलिसी नहीं बनाई गई है।
खांडू ने कहा कि वह खुद 'कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया' से बात करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सेक्टर को सहारा देने के लिए कौन से खास पॉलिसी उपाय किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा बागानों का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी अरुणाचल में 'अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन' के तहत आता है, जबकि वर्कशॉप में शामिल कई किसानों ने पायलट या मॉडल प्रोजेक्ट के तौर पर कॉफी की खेती शुरू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अलग-अलग तरह की खेती-मौसम की स्थितियां, उपजाऊ जमीन और अलग-अलग मौसम वाले इलाकों की मौजूदगी कॉफी की खेती को बढ़ाने के लिए एक अच्छा आधार देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मकसद सिर्फ खेती का दायरा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर पैदावार, कॉफी बीन्स की क्वालिटी और वैल्यू एडिशन व मज़बूत वैल्यू चेन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाना भी होना चाहिए।
कॉफी को युवा उद्यमियों के लिए एक अच्छा मौका बताते हुए खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में बढ़ता टूरिज्म सेक्टर कॉफी उगाने वालों और कारोबारियों के लिए और मौके पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, "अरुणाचल आने वाले टूरिस्ट हमेशा कॉफी पसंद करते हैं। अरुणाचल में टूरिज्म के इतने बढ़ने के साथ, यह हमारे युवाओं के लिए एक बहुत अच्छा मौका है।"
उन्होंने युवाओं से रोजगार और उद्यमिता के तौर पर कॉफी की खेती, प्रोसेसिंग और इससे जुड़े कारोबारों को आजमाने की अपील की और कहा कि राज्य को इस सेक्टर से जुड़े उभरते मौकों को नहीं गंवाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कॉफी के बढ़ते ग्लोबल मार्केट और एक कमर्शियल फसल के तौर पर इसकी संभावनाओं पर भी रोशनी डाली, साथ ही कॉफी पीने से सेहत को होने वाले फायदों का भी जिक्र किया।


