महाराष्ट्र: कांग्रेस ने भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैलियों की आलोचना की
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि भाजपा का ‘लोकतंत्र और संविधान बचाओ’ का आक्रामक अभियान 'खुद चोर कोतवाल को डांटे' जैसा है।

मुंबई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को दावा किया कि भाजपा का ‘लोकतंत्र और संविधान बचाओ’ का आक्रामक अभियान 'खुद चोर कोतवाल को डांटे' जैसा है।
दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया अलायंस द्वारा आयोजित अभूतपूर्व ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मेगा रैली ने मोदी सरकार को करारा झटका दिया है। इस रैली से घबराकर भाजपा अब देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ रैलियां आयोजित कर रही है।
सपकाल ने कहा कि हालांकि, भाजपा और आरएसएस ही लोकतंत्र और संविधान के असली दुश्मन हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा कांग्रेस पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाना हास्यास्पद है। भाजपा की मातृ संस्था आरएसएस, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान को स्वीकार नहीं करती, जबकि भाजपा नेता खुलेआम इसे बदलने की बात करते रहे हैं। भाजपा संविधान का नाम तो लेती है, लेकिन उसके हृदय में मनुस्मृति बसी है।
भाजपा और मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधते हुए सपकाल ने आगे कहा कि 13 साल सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा अपनी उपलब्धियों को उजागर करने के बजाय जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी को ही निशाना बनाती रहती है।
उन्होंने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकारें 2024 के चुनावों में वोट चोरी करके सत्ता में आईं।
उन्होंने कहा कि उनके कथित चुनावी भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो चुका है, और वे न केवल सत्ता खोएंगे, बल्कि चुनाव हारने के बाद कार्रवाई का सामना करने की आशंका ने उनकी नींद भी उड़ा दी है।
सपकाल ने टिप्पणी की कि केंद्र सरकार, ज्ञानेश कुमार की मदद से, 13 करोड़ नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर रही है। भाजपा सरकार संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार छीन रही है। भाजपा घुसपैठियों की बात तो करती रहती है, लेकिन यह खुलासा नहीं करती कि वास्तव में कितने लोगों को पकड़ा गया है।
अगर फडणवीस में हिम्मत है, तो उन्हें नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने के बहाने के रूप में इस मुद्दे का इस्तेमाल करने के बजाय घुसपैठियों के आंकड़े जारी करने चाहिए। लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अर्थ है चुनावों के माध्यम से सरकार परिवर्तन, और राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मौजूद हैं।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण करने और लोकतंत्र को हाईजैक करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को संवैधानिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में नियुक्त किया गया है, जिससे वे प्रभावी रूप से सत्ताधारी दल के नियंत्रण में आ गए हैं।


