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यूपी बोर्ड के रिजल्ट में लड़कियों का दबदबा, 10वीं में कशिश एवं अंशिका टॉपर, 12वीं में शिखा वर्मा ने मारी बाजी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश बोर्ड से 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) ने गुरुवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित कर दिए। एक बार फिर बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी।

यूपी बोर्ड के रिजल्ट में लड़कियों का दबदबा, 10वीं में कशिश एवं अंशिका टॉपर, 12वीं में शिखा वर्मा ने मारी बाजी
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश बोर्ड से 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) ने गुरुवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित कर दिए। एक बार फिर बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी।

हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) की परीक्षा में सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83 प्रतिशत अंक हासिल कर संयुक्त रूप से प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वहीं, इंटरमीडिएट (कक्षा 12वीं) में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60 प्रतिशत अंकों के साथ टॉप किया है।

बोर्ड परीक्षाएं प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्थापित 8,033 केंद्रों पर 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच आयोजित की गई थीं। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से 4 अप्रैल तक कुल 254 केंद्रों पर कराया गया, जिसमें करीब 55,976 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई।

इंटरमीडिएट की लगभग 1.23 करोड़ कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने बताया कि परिणाम जारी होने के साथ ही टॉपर्स की सूची भी घोषित कर दी गई है। राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित किया जाएगा। छात्र अपने परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट, डिजिलॉकर, और एसएमएस के माध्यम से देख सकते हैं।

इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों पर 15 कार्य दिवसों में शांतिपूर्ण एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराई गईं। हाईस्कूल में लगभग 26.02 लाख और इंटरमीडिएट में 24.91 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के व्यापक दायरे को दर्शाता है।

परीक्षाओं के सफल आयोजन के बाद 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच मात्र 15 कार्य दिवसों में पूरा किया गया। इस बार परिणाम को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी


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