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‘वंदे मातरम्’ विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे बोले- मैंने वही गाया जो गांधी, नेहरू और वाजपेयी गाते थे

खरगे ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही ‘वंदे मातरम्’ गाया, जिसे ये नेता गाते थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इस तरह ‘वंदे मातरम्’ गाना अपराध है तो गांधी, नेहरू और पटेल के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

‘वंदे मातरम्’ विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे बोले- मैंने वही गाया जो गांधी, नेहरू और वाजपेयी गाते थे
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पणजी: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी सियासी टकराव अब और तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने वही ‘वंदे मातरम्’ गाया है, जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गाते रहे हैं। खरगे ने सवाल उठाया कि अगर उनके द्वारा राष्ट्रगीत गाना अपराध है तो फिर उन नेताओं को भी दोषी माना जाना चाहिए, जिन्होंने इसी परंपरा का पालन किया था। गोवा में मीडिया से बातचीत के दौरान खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने कोई नई परंपरा शुरू नहीं की है, बल्कि वह करीब 90 साल से चली आ रही परंपरा को ही आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल किसी पार्टी के कह देने से कोई नया नियम लागू नहीं हो जाता।

‘अगर अपराध है तो गांधी-नेहरू पर भी केस करो’

खरगे ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही ‘वंदे मातरम्’ गाया, जिसे ये नेता गाते थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इस तरह ‘वंदे मातरम्’ गाना अपराध है तो गांधी, नेहरू और पटेल के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेते हुए कहा कि अटल जी भी इसी तरह ‘वंदे मातरम्’ गाते थे, इसलिए बीजेपी को इस आधार पर उनके खिलाफ भी सवाल उठाना चाहिए। खरगे ने कहा कि बीजेपी जो कहेगी, वह देश का नियम नहीं बन जाएगा। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय गीत से जुड़ी परंपराओं और प्रक्रियाओं को राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं बदला जा सकता।

कांग्रेस ने 90 साल पुरानी परंपरा जारी रखी

खरगे ने कहा कि कांग्रेस के भीतर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक पुरानी परंपरा रही है और पार्टी उसी का पालन कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के गठन से पहले ही कांग्रेस राष्ट्रीय गीत से जुड़े विषयों पर अपनी परंपरा तय कर चुकी थी। उन्होंने कहा कि देश में सरकारें बदलती रहती हैं और हर सरकार अपनी पसंद के हिसाब से नियम नहीं बना सकती। उनके मुताबिक, किसी राजनीतिक दल के बयान को राष्ट्रीय नियम मान लेना उचित नहीं होगा।

कहां से शुरू हुआ विवाद?

‘वंदे मातरम्’ को लेकर मौजूदा विवाद 15 अगस्त के बाद शुरू हुआ। बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत का कथित तौर पर अपमान करने का आरोप लगाया। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि एक कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी के इशारे के बाद ‘वंदे मातरम्’ को बीच में रोक दिया गया। इसके बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू किया और राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने इन आरोपों पर अपनी अलग व्याख्या रखी और कहा कि पार्टी लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार ही राष्ट्रगीत का गायन करती रही है।

गोवा कार्यक्रम के बाद फिर गरमाया मुद्दा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गोवा में कांग्रेस की एक रैली के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों के बजाय केवल शुरुआती दो छंद गाए गए। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाया। इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई। बीजेपी ने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत क्यों नहीं गाया गया, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश बताया।


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