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बजट सत्र के सातवें दिन भी हंगामा जारी, राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में पारित

संसद के बजट सत्र का सातवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। अमेरिका के साथ कथित डील और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहा।

बजट सत्र के सातवें दिन भी हंगामा जारी, राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में पारित
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नई दिल्‍ली। संसद के बजट सत्र का सातवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। अमेरिका के साथ कथित डील और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहा। लोकसभा में जहां राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, वहीं विपक्ष ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को बोलने का अवसर न दिए जाने का आरोप लगाते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

लोकसभा में 65 सेकंड में स्थगन

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा थमता नहीं दिखा। कार्यवाही शुरू होने के महज 65 सेकंड के भीतर ही अध्यक्ष ने सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया। अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सदन का सुचारु संचालन संभव नहीं है। अध्यक्ष ने सदस्यों से नियमों और परंपराओं का पालन करने की अपील भी की।

राहुल गांधी को लेकर विपक्ष का विरोध

विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष या प्रमुख विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा कि चार दिन हो गए, लेकिन राहुल गांधी नियमों का पालन नहीं कर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को कई बार बोलने का मौका दिया गया है और सदन नियमों के तहत ही चलेगा।

राज्यसभा में भी गरमाया मुद्दा

लोकसभा की घटनाओं की गूंज राज्यसभा में भी सुनाई दी। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि दूसरे सदन में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। इस पर राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में लोकसभा के कामकाज पर चर्चा नहीं की जा सकती। नड्डा ने खड़गे से कहा कि वे अपनी पार्टी को स्वतंत्र रूप से चलाएं और “अबोध बालक का बंधक” न बनें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने सदन को चलने ही नहीं दिया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया।

धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

हंगामे के बीच लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। आमतौर पर इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा के बाद प्रधानमंत्री जवाब देते हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार लोकसभा में प्रधानमंत्री के उत्तर के बिना ही प्रस्ताव पारित होने की संभावना जताई गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दे सकते हैं। इससे पहले भी कई अवसरों पर प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में अलग-अलग समय पर जवाब दिया है।

विवाद के मूल मुद्दे

संसद में जारी गतिरोध के पीछे दो प्रमुख मुद्दे बताए जा रहे हैं। पहला, अमेरिका के साथ कथित डील को लेकर विपक्ष की ओर से पारदर्शिता की मांग। विपक्ष सरकार से इस समझौते की शर्तों और प्रभावों पर स्पष्ट बयान चाहता है। दूसरा मुद्दा पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से जुड़ा है, जिस पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन नियमों के अनुसार ही चलेगा और व्यवधान के बीच चर्चा संभव नहीं है।

रणनीति पर नजर

लगातार सात दिनों से जारी हंगामे ने बजट सत्र की कार्यवाही को प्रभावित किया है। महत्वपूर्ण विधायी कार्य और वित्तीय चर्चाएं बाधित हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से चर्चा का रास्ता नहीं निकालते, तो सत्र का बड़ा हिस्सा व्यवधान में गुजर सकता है।


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