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राहुल गांधी पर भड़के पीयूष गोयल,कहा-अमेरिका से व्यापार समझौते पर देश में फैला रहे भ्रम

मीडिया से बातचीत में पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस नेता देश के सामने भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें भारत के विकास और आर्थिक प्रगति से कोई लेना-देना नहीं है।”

राहुल गांधी पर भड़के पीयूष गोयल,कहा-अमेरिका से व्यापार समझौते पर देश में फैला रहे भ्रम
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नई दिल्ली। अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और उनके रवैये की तुलना पाकिस्तान और चीन से कर दी।

‘देश को गुमराह कर रहे हैं’

मीडिया से बातचीत में पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस नेता देश के सामने भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें भारत के विकास और आर्थिक प्रगति से कोई लेना-देना नहीं है।” गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत के आर्थिक हितों को मजबूत करने के लिए किया गया है और इससे निवेश, निर्यात तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सवाल किया, “क्या राहुल गांधी देश में हो रहे लाखों-करोड़ों रुपये के निवेश से परेशान हैं?”

जल्‍द साझा बयान जारी करेंगे


उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी दोनों सेक्टर को सपोर्ट किया है, उनके हितों की रक्षा की। जो लोग अलग-अलग सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, खासकर ऐसे सेक्टर जिनमें ज्यादा मेहनत लगती है और जो लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। गोयल ने कहा कि सभी इस डील से उत्साहित हैं। इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का धन्यवाद, उन्होंने पीएम मोदी की मित्रता का सम्मान किया। दोनों देश इस डील पर जल्द ही इस पर साझा बयान जारी करेंगे। इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा। इससे हमारे इंजीनियरिंग सेक्टर्स के पार्ट्स बनाने वाले, टेक्सटाइल, मरीन गुड, ज्वेलर सेक्टर समेत सभी मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर को बहुत सारे मौके मिलेंगे।


संसद में हंगामे पर जताई नाराजगी

वाणिज्य मंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि उन्हें संसद में इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने सदन में हंगामा किया और चर्चा बाधित की। गोयल ने कहा, “विपक्षी नेताओं ने बेहद गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया। वे माननीय अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए और उनका अपमान किया। मैं राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के इस व्यवहार की कड़ी निंदा करता हूं।” उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने व्यवधान का रास्ता चुना।

राहुल गांधी के आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में यह व्यापार समझौता किया है। उन्होंने दावा किया कि इस डील के जरिए किसानों के हितों की अनदेखी की गई और इसे “घुटने टेकने” जैसा कदम बताया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को समझौते की शर्तें स्पष्ट करनी चाहिए और संसद में इस पर विस्तृत बहस होनी चाहिए।

गिरिराज सिंह का तीखा बयान

इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल नरवणे के संस्मरण का हवाला देने के प्रयासों को लेकर राहुल गांधी का व्यवहार “पाकिस्तान और चीन जैसा” है। एक साक्षात्कार में गिरिराज सिंह ने कहा कि संसदीय इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी सदस्य ने लोकसभा अध्यक्ष के आदेश का पालन करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “सदन नियमों, कानूनों और व्यवस्था के तहत चलना चाहिए।”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी के एनजीओ को संसद के भीतर और बाहर भारतीय सेना और देश का अपमान करने के लिए चीन से धन मिला है। हालांकि इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

ममता बनर्जी पर भी निशाना

गिरिराज सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कोलकाता में आई-पैक (I-PAC) के परिसरों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सबूत ले जाने की कोशिश की गई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी चरम पर

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और संसद में हुए घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। जहां सरकार इसे भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक साझेदारी की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे देशहित के खिलाफ और किसानों के लिए नुकसानदेह करार दे रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का मूल्यांकन उसकी शर्तों और दीर्घकालिक प्रभावों के आधार पर किया जाना चाहिए। संसद में विस्तृत चर्चा से ही इसके वास्तविक लाभ-हानि का आकलन संभव है।

सियासी टकराव तेज


सरकार ने संकेत दिया है कि वह व्यापार समझौते पर विस्तृत जानकारी देने के लिए तैयार है। विपक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को उठाता रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। फिलहाल, व्यापार समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज है, और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने हैं।


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