भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल गांधी का हमला तेज, कहा- किसानों के हितों से किसी कीमत पर समझौता नहीं
सत्तापक्ष की ओर से हो रही आलोचनाओं के बावजूद राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वे अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि चाहे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाए या उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

नई दिल्ली: अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर संसद में उठे विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने आरोपों को दोहराते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने के प्रस्ताव और सत्तापक्ष की ओर से हो रही आलोचनाओं के बावजूद राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वे अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि चाहे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाए या उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका दावा है कि उन्होंने संसद में जो कहा, वह किसानों और देश के हितों से जुड़ी सच्चाई है।
‘किसान-विरोधी समझौता’ का आरोप
सरकार और भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो जारी कर अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जो भी व्यापार समझौता किसानों की आजीविका को प्रभावित करता है और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करता है, वह किसान-विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील के जरिए भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोला जा रहा है, जिससे देश के छोटे और सीमांत किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी।
‘नॉन-टैरिफ बैरियर’ पर सवाल
राहुल गांधी ने विशेष रूप से इस समझौते में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ‘नॉन-टैरिफ बैरियर’ हटाने के प्रावधान पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे प्रावधान भारतीय बाजार को विदेशी कृषि उत्पादों के लिए अधिक सुलभ बना देंगे। उन्होंने दावा किया कि इससे कपास, सोयाबीन, ज्वार, फल और ड्राय फ्रूट्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। राहुल गांधी के मुताबिक, भारत के 99.5 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास पर्याप्त संसाधन, सब्सिडी या सुरक्षा तंत्र नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारतीय किसानों को सब्सिडी प्राप्त और बड़े पैमाने पर उत्पादित अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करना पड़ा, तो वे टिक नहीं पाएंगे और आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।
‘किसानों से नहीं ली गई राय’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस व्यापार समझौते पर किसानों से कोई परामर्श नहीं किया गया और संसद को भी पूरी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार अब ऐसे कदम उठा रही है जो किसानों के भविष्य को जोखिम में डाल सकते हैं। उनका कहना है कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यापक चर्चा आवश्यक है, खासकर तब जब मामला करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ा हो।
भाजपा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने उनके आरोपों को निराधार बताया है। भाजपा का कहना है कि व्यापार समझौता देश के व्यापक आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर किया गया है और इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की संभावना कम है। राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे राजनीतिक दबाव से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने सत्तापक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे जो उचित समझें, करें, लेकिन वे अपने बयान से “एक इंच भी पीछे” नहीं हटेंगे।
‘काले कानून’ और ‘कॉरपोरेट हित’ का आरोप
अपने बयान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले कृषि कानूनों के जरिए किसानों के हितों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी और अब व्यापार समझौते के माध्यम से भारतीय बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देती है, जबकि किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है।
संसद से सड़क तक लड़ाई की चेतावनी
राहुल गांधी ने कहा कि किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी आवाज उठाई जाएगी। उनका कहना है कि देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला व्यापक चर्चा और सहमति से होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि किसानों की आजीविका से जुड़े किसी भी समझौते का कांग्रेस पार्टी विरोध करेगी।
राजनीतिक बहस तेज
अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे आर्थिक अवसर और रणनीतिक साझेदारी के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के हितों के खिलाफ बता रहा है। संसद में इस मुद्दे पर और चर्चा की संभावना है। साथ ही, यदि विपक्ष इस मुद्दे को सार्वजनिक अभियान का रूप देता है, तो यह आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वे अपने रुख पर कायम रहेंगे। अब यह देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या इस डील के प्रावधानों को लेकर कोई अतिरिक्त जानकारी सार्वजनिक की जाती है।


