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पीएम मोदी की ‘संयम’ अपील पर राहुल गांधी का हमला, बोले- ये सलाह नहीं सरकार की नाकामी का सबूत

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हर आर्थिक चुनौती का बोझ आम लोगों पर डाल देती है। उन्होंने कहा कि महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों पर सरकार ठोस समाधान देने के बजाय जनता से संयम बरतने की अपील करती है।

पीएम मोदी की ‘संयम’ अपील पर राहुल गांधी का हमला, बोले- ये सलाह नहीं सरकार की नाकामी का सबूत
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नई दिल्‍ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल, गैस और सोने के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है जहां सरकार जनता को यह बताने लगी है कि क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं खरीदना चाहिए, कहां जाना चाहिए और कहां नहीं जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील को “उपदेश नहीं बल्कि सरकार की नाकामी का प्रमाण” बताया।

राहुल गांधी ने साधा निशाना

राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने जनता से कहा है कि सोना न खरीदें, विदेश यात्रा न करें, पेट्रोल कम इस्तेमाल करें, खाने के तेल और खाद की खपत घटाएं, मेट्रो में सफर करें और घर से काम करें। राहुल गांधी ने कहा, “ये सलाह नहीं बल्कि सरकार की विफलता का सबूत हैं। हर बार जनता से त्याग की उम्मीद की जाती है, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचती नजर आती है।”

‘हर बार जनता पर डाली जाती है जिम्मेदारी’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हर आर्थिक चुनौती का बोझ आम लोगों पर डाल देती है। उन्होंने कहा कि महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों पर सरकार ठोस समाधान देने के बजाय जनता से संयम बरतने की अपील करती है। राहुल गांधी ने लिखा, “हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है ताकि सरकार खुद जवाबदेही से बच सके।” उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि देश चलाना अब “Compromised PM” के बस की बात नहीं रह गया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान वैश्विक हालात और बढ़ते ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए देशवासियों से संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। भारत जैसे देशों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि जहां संभव हो, वहां निजी वाहनों की जगह मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। उन्होंने कारपूलिंग और “वर्क फ्रॉम होम” जैसे विकल्पों को भी अपनाने की सलाह दी थी।

सोने की खरीद टालने की अपील

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक साल तक सोना न खरीदने की भी अपील की थी। उनका कहना था कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। उन्होंने कहा था कि अगर लोग कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम कर दें तो इससे देश की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने खाने के तेल की खपत कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही थी।

विदेशी मुद्रा बचाने पर दिया था जोर

पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने से भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशी मुद्रा की बचत बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने माल ढुलाई के लिए रेलवे के अधिक इस्तेमाल की बात कही और लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने की अपील भी की थी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, छोटे-छोटे बदलावों के जरिए देश बड़े आर्थिक दबाव को कम कर सकता है।

आर्थिक नीति पर उठाए सवाल

राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार वैश्विक हालात का हवाला देकर अपनी नीतिगत कमियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने देशहित में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपील की है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

वैश्विक संकट के बीच बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चलता है तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर महंगाई और आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की अपील और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने देश में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और आर्थिक चुनौतियों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।


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