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हल्द्वानी में खरगे के भाषण के बाद ‘शुद्धिकरण हवन’ पर भड़के राहुल गांधी, बोले- दोषियों पर हो कार्रवाई

राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण हवन’ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त 2026 को मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था।

हल्द्वानी में खरगे के भाषण के बाद ‘शुद्धिकरण हवन’ पर भड़के राहुल गांधी, बोले- दोषियों पर हो कार्रवाई
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत में आज भी दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच संघर्ष जारी है। राहुल गांधी के मुताबिक एक तरफ संविधान की विचारधारा है, जबकि दूसरी तरफ आरएसएस की विचारधारा है। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक न्याय और समानता को लेकर अभी भी लंबी लड़ाई बाकी है। राहुल गांधी ने अपने बयान में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और अत्याचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश में करोड़ों दलितों के साथ आज भी अन्याय हो रहा है और सदियों से चली आ रही सामाजिक असमानता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण हवन’ का मुद्दा उठाया

राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण हवन’ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त 2026 को मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। कांग्रेस नेता के मुताबिक, जनसभा के दो दिन बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने कथित तौर पर उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण हवन’ किया। राहुल गांधी ने इस घटना को दलितों के प्रति भेदभाव से जोड़ते हुए कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर देश में संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, तो किसी व्यक्ति के भाषण के बाद किसी स्थान का ‘शुद्धिकरण’ करने जैसी घटनाएं कैसे हो सकती हैं।

‘दलितों के साथ आज भी हो रहा भेदभाव’

राहुल गांधी ने कहा कि दलितों के साथ दशकों से भेदभाव होता आया है और कई जगहों पर आज भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर चाय की दुकानों में दलितों के लिए अलग कप रखने की शिकायतें मिलती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ इलाकों में दलित युवाओं को शादी के दौरान घोड़े पर चढ़ने को लेकर प्रताड़ित किया जाता है। राहुल ने स्कूलों में दलित बच्चों के साथ भेदभाव के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यवस्था में मौजूद भेदभाव के कारण दलित समुदाय के लोगों को आगे बढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी दलितों की तरक्की को स्वीकार नहीं कर पाती। राहुल गांधी ने कहा कि दलित जितना सफल होता है, उसके खिलाफ उतना ही बड़ा प्रहार किया जाता है।

संविधान बनाम आरएसएस की विचारधारा का दावा

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में संविधान को सामाजिक समानता और अधिकारों का आधार बताया। उन्होंने कहा कि देश में संविधान की मूल भावना और आरएसएस की विचारधारा के बीच वैचारिक लड़ाई जारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की बात करती है। उनके मुताबिक, दलितों और वंचित वर्गों को समान अवसर देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

पुणे में महिलाओं की आजादी का मुद्दा भी उठाया

राहुल गांधी ने इससे पहले 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता पर भी विस्तार से बात की थी। उन्होंने करीब एक घंटे 16 मिनट तक महिलाओं की स्वतंत्रता और समाज में उनकी पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने कहा कि महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे के नाम से नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसकी अपनी पहचान होनी चाहिए। मनुस्मृति का जिक्र करते हुए उन्होंने महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच की आलोचना की और इसे शर्मनाक बताया।

कांग्रेस नेता के लगातार बयानों से साफ है कि पार्टी सामाजिक न्याय, दलित अधिकार, महिला स्वतंत्रता और संविधान के मुद्दों को लेकर भाजपा और आरएसएस पर राजनीतिक हमला तेज कर रही है। वहीं हल्द्वानी की कथित घटना को लेकर राहुल गांधी ने कार्रवाई की मांग कर इस मुद्दे को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।


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