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स्कूली शिक्षा में चंडीगढ़ सबसे आगे, फिर भी ‘उत्कर्ष’ से दूर; यूपी, बिहार समेत कई राज्य अब भी आकांक्षी श्रेणी में

PGI 2.0 रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ ने 761 से 820 अंकों के दायरे में प्रदर्शन करते हुए ‘उत्तम-3’ ग्रेड प्राप्त किया। यह श्रेणी लगभग 61 से 70 प्रतिशत प्रदर्शन का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि चंडीगढ़ देश में शीर्ष पर रहा, लेकिन वह अब भी सर्वोच्च श्रेणियों से काफी पीछे है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में अभी और सुधार की जरूरत है।

स्कूली शिक्षा में चंडीगढ़ सबसे आगे, फिर भी ‘उत्कर्ष’ से दूर; यूपी, बिहार समेत कई राज्य अब भी आकांक्षी श्रेणी में
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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 की 2025-26 रिपोर्ट जारी कर दी। इस रिपोर्ट में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ ने एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ‘उत्तम-3’ श्रेणी में स्थान हासिल किया है। हालांकि, कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सर्वोच्च ‘उत्कर्ष’, ‘उत्तम-1’ या ‘उत्तम-2’ श्रेणी तक नहीं पहुंच सका। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि कई बड़े राज्यों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता अब भी बनी हुई है।

चंडीगढ़ को मिले 761 से 820 अंक

PGI 2.0 रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ ने 761 से 820 अंकों के दायरे में प्रदर्शन करते हुए ‘उत्तम-3’ ग्रेड प्राप्त किया। यह श्रेणी लगभग 61 से 70 प्रतिशत प्रदर्शन का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि चंडीगढ़ देश में शीर्ष पर रहा, लेकिन वह अब भी सर्वोच्च श्रेणियों से काफी पीछे है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में अभी और सुधार की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्य आकांक्षी श्रेणी में

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्य अब भी ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी में शामिल हैं। इन राज्यों का प्रदर्शन 521 से 580 अंकों के बीच रहा। रिपोर्ट संकेत देती है कि इन क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता, सीखने के परिणाम और बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

चार प्रमुख श्रेणियों में राज्यों का प्रदर्शन

रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके कुल स्कोर के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है।

उत्तम-3 (761-820 अंक):

चंडीगढ़

प्रचेष्टा-1 (701-760 अंक):

पंजाब, दिल्ली, केरल, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव

प्रचेष्टा-2 (641-700 अंक):

हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, लक्षद्वीप

प्रचेष्टा-3 (581-640 अंक):

हरियाणा, तेलंगाना, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, लद्दाख सहित कुल 13 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी-1 (521-580 अंक):

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित कुल 13 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश।

रिपोर्ट की एक सकारात्मक बात यह रही कि इस बार ‘आकांक्षी-2’ और ‘आकांक्षी-3’ श्रेणियों में कोई राज्य शामिल नहीं रहा।

70 मानकों पर किया गया मूल्यांकन

PGI 2.0 रिपोर्ट में राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन 1,000 अंकों के पैमाने पर किया गया। इसके लिए कुल 70 संकेतकों (इंडिकेटर्स) का उपयोग किया गया। इनमें 47 संकेतक शिक्षा के परिणाम (Outcome Indicators) से जुड़े थे, जबकि 23 संकेतक प्रबंधन और प्रशासन (Governance Indicators) से संबंधित थे। मूल्यांकन के दौरान सीखने के परिणाम (Learning Outcomes), शिक्षा तक पहुंच (Access), स्कूलों का बुनियादी ढांचा (Infrastructure), उपलब्ध सुविधाएं, विद्यार्थियों की भागीदारी, शिक्षक प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया।

रिपोर्ट का उद्देश्य क्या है?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, PGI 2.0 का उद्देश्य केवल राज्यों की रैंकिंग तय करना नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की पहचान कर सुधार के लिए दिशा प्रदान करना है। रिपोर्ट के माध्यम से राज्यों को यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की कार्यप्रणाली से क्या सीखा जा सकता है।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की चुनौती बरकरार

हालांकि कई राज्यों ने पिछले वर्षों की तुलना में अपने प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया है, लेकिन सर्वोच्च श्रेणियों में किसी भी राज्य का स्थान न बना पाना इस बात का संकेत है कि देश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा में निवेश, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, आधुनिक बुनियादी ढांचा और सीखने के परिणामों पर लगातार ध्यान देकर ही राज्यों को उच्च श्रेणियों तक पहुंचाया जा सकता है। PGI 2.0 रिपोर्ट इसी दिशा में राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज मानी जा रही है।


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