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ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारत था समुद्री हमले के बेहद करीब, नौसेना प्रमुख का बड़ा खुलासा

एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने तेजी से अपनी ताकत को तैनात किया और पूरी तरह तैयार स्थिति में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों की आक्रामक तैनाती और रणनीतिक स्थिति इतनी सशक्त थी कि हमला कभी भी किया जा सकता था।

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारत था समुद्री हमले के बेहद करीब, नौसेना प्रमुख का बड़ा खुलासा
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मुंबई। ‘नौसेना अलंकरण समारोह’ के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर समुद्री प्रहार करने के बेहद करीब पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि भारत हमले से महज कुछ मिनट दूर था, लेकिन तभी पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच उस समय के तनाव और भारतीय नौसेना की तैयारियों की गंभीरता को दर्शाता है।

‘हमले से कुछ मिनट दूर’ था भारत

एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने तेजी से अपनी ताकत को तैनात किया और पूरी तरह तैयार स्थिति में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों की आक्रामक तैनाती और रणनीतिक स्थिति इतनी सशक्त थी कि हमला कभी भी किया जा सकता था। हालांकि, ठीक उसी समय पाकिस्तान की ओर से ‘काइनेटिक एक्शन’ यानी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध आया, जिसके बाद हालात को और नहीं बढ़ाया गया।

नौसेना की तेज तैनाती और आक्रामक रुख

नौसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय नौसेना की तैयारियों और संकल्प का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि नौसेना की इकाइयों ने बेहद कम समय में अपनी तैनाती सुनिश्चित की और पूरे अभियान के दौरान आक्रामक रुख बनाए रखा। उनके अनुसार, इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय नौसेना किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। इससे देश के नागरिकों का सेना पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

वैश्विक समुद्री संकट पर भी जताई चिंता

एडमिरल त्रिपाठी ने अपने संबोधन में वैश्विक समुद्री हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, इस संघर्ष के बाद से अब तक 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर मात्र 6-7 रह गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में समुद्र अब केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन गए हैं।

‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ के रूप में भारत की भूमिका

नौसेना प्रमुख ने भारत की ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने क्षेत्रीय संकटों में हमेशा तेजी से सहायता पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन ब्रह्म’ (म्यांमार) और ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ (श्रीलंका) जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना ने मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आत्मनिर्भरता पर जोर

एडमिरल त्रिपाठी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत नौसेना की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में भारतीय नौसेना ने 12 नए जहाजों और पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह उपलब्धि न केवल नौसेना की ताकत बढ़ाती है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देती है।

सम्मानित हुए दो शीर्ष अधिकारी

समारोह के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में उत्कृष्ट योगदान के लिए नौसेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों को ‘युद्ध सेवा पदक’ से सम्मानित किया गया। नौसेना संचालन महानिदेशक (DGNO) वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को इस ऑपरेशन के दौरान नौसेना अभियानों की योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सम्मानित किया गया। प्रशस्ति पत्र के अनुसार, उन्होंने तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारतीय प्रतिक्रिया योजना को तैयार करने और लागू करने में अहम योगदान दिया। वहीं, वाइस एडमिरल राहुल गोखले को उनकी रणनीतिक दूरदर्शिता के लिए सम्मानित किया गया। उनके नेतृत्व में सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के छह सफल परीक्षण और हमले सुनिश्चित किए गए।


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