CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का देशव्यापी मार्च, चुनाव आयोग के खिलाफ बढ़ा सियासी घमासान
जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे पार्टी कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रभारी नासिर हुसैन ने किया।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन शुरू किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकाला और चुनाव प्रक्रिया तथा मतदाता सूची को लेकर उठाए जा रहे सवालों की जांच की मांग की। पटना से जम्मू तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे भी लगाए गए। कांग्रेस का कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया नहीं जाता और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, चुनाव आयोग ने कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच कहा है कि आयोग के अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए जाते हैं।
जम्मू में निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन
जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे पार्टी कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रभारी नासिर हुसैन ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर यदि गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और चुनाव आयोग को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने CEC के इस्तीफे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल सामने आए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया।
25 सितंबर को देशभर में मार्च
कांग्रेस ने 25 सितंबर को सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों को अपने-अपने राज्यों में चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का निर्देश दिया। पार्टी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान CEC को पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की जा रही है। इसके बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस समितियों को जिला मुख्यालयों तक मार्च निकालने का कार्यक्रम दिया गया है। यानी पार्टी ने विरोध को प्रदेश स्तर से जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति बनाई है।
महुआ मोइत्रा ने भी पुलिस में दी शिकायत
विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्राथमिकी दर्ज करने और जांच की मांग की है। मोइत्रा का आरोप है कि यदि अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद कुछ फैसले लिए गए हैं, तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की है।
CJP ने भी उठाया चुनाव आयोग का मुद्दा
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर काकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी अपना अभियान शुरू किया है। संगठन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की है। CJP ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके तथा सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने ‘चुनाव आयोग ठीक करो’ अभियान शुरू करने की बात कही है। संगठन ने मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया रोकने, जनवरी 2025 की स्थिति बहाल करने और संबंधित रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट को सौंपने जैसी मांगें भी रखी हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद की पृष्ठभूमि में उस रिपोर्ट का उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर कई मौकों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में इन कथित मतभेदों को SIR, मतदाता सूची और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मामलों से जोड़ा गया है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श, लिखित टिप्पणियां और अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति में लिए गए हैं।


