लोकसभा में हंगामे के बीच 8 सांसद निलंबित, स्पीकर की ओर कागज फेंकने पर सख्त कार्रवाई
सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज फेंके जाने की घटना के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए आठ सांसदों को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज फेंके जाने की घटना के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए आठ सांसदों को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही दिन भर में कई बार स्थगित करनी पड़ी। अंततः लोकसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
चौथी बार कार्यवाही शुरू होने पर लिया गया फैसला
दोपहर करीब तीन बजे जब चौथी बार लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो पीठासीन अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि स्पीकर की ओर कागज फेंकने वाले सदस्यों के नाम दर्ज किए जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ऐसे सांसदों को निलंबित करने का प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा। प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस निर्णय के बाद भी सदन में हंगामा थमता नजर नहीं आया।
किन सांसदों पर हुई कार्रवाई?
लोकसभा ने जिन आठ विपक्षी सांसदों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया, उनके नाम इस प्रकार हैं:
अमरिंदर सिंह, किरण रेड्डी, राजा वड़िग, मणिकम टैगौर, गुरजीत औजला, हिबी इडेन, वेंकेट रमन, प्रशांत पडोले
इन सभी सांसदों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन का अर्थ है कि वे मौजूदा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर बढ़ा विवाद
हंगामे की पृष्ठभूमि में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने का मुद्दा भी रहा। कार्यवाही के दौरान पीठासीन अधिकारी ने राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं दी और अगली सूचीबद्ध वक्ताओं के नाम पुकार दिए। इस पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया। कांग्रेस सहित समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने भी इसे अस्वीकार्य बताते हुए विरोध दर्ज कराया। कई विपक्षी सांसदों ने बोलने से इनकार कर दिया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
वेल में पहुंचे सांसद, नारेबाजी तेज
विवाद बढ़ने के बाद विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज उछाले। यह घटना सदन की मर्यादा से जुड़ा गंभीर मामला मानी जा रही है। पीठासीन अधिकारी ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने और सदन की गरिमा का सम्मान करने की अपील की, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आ सकी। हंगामा बढ़ता देख कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
‘सदन की गरिमा से समझौता नहीं’
सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि सदन में इस तरह का आचरण अस्वीकार्य है और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के अपने तरीके होते हैं, लेकिन स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज फेंकना और सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है।
ध्वनिमत से पारित प्रस्ताव के बाद संबंधित सांसदों के निलंबन की घोषणा की गई।
विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना संसदीय परंपराओं के विपरीत है। विपक्ष ने इसे अभिव्यक्ति के अधिकार से जोड़ते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष की ओर से आधिकारिक संयुक्त बयान की प्रतीक्षा है।
बार-बार स्थगन के बाद सत्र बुधवार तक टला
लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन सुचारु रूप से नहीं चल सकी। अंततः कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद के बजट सत्र के दौरान बार-बार हो रहे व्यवधानों से विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बुधवार को सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चल पाती है या नहीं।
लोकसभा में मंगलवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने एक बार फिर संसदीय शिष्टाचार और राजनीतिक टकराव के बीच संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


